इस नई व्यवस्था का उद्देश्य पूरे सिस्टम को डिजिटल, पारदर्शी और नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाना है। यह नियमावली 'जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969' के प्रावधानों के तहत लागू की जाएगी, जिसमें कई नए बदलाव किए गए हैं जो सीधे आम जनता को राहत पहुंचाएंगे।
21 दिन के भीतर पंजीकरण पूरी तरह मुफ्त
नई व्यवस्था के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार को दी जाती है, तो उसका पंजीकरण बिल्कुल निःशुल्क होगा। इस अवधि के भीतर नागरिकों को किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं देना होगा। साथ ही, प्रमाण पत्र अब डिजिटल माध्यम से भी आसानी से प्राप्त किया जा सकेगा, जिससे लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
समय सीमा के बाद लागू होगा विलंब शुल्क
यदि निर्धारित समय सीमा में पंजीकरण नहीं कराया जाता है, तो विलंब शुल्क लागू होगा: 21 से 30 दिन के भीतर पंजीकरण पर ₹20, 30 दिन से 1 वर्ष के भीतर पंजीकरण पर ₹50 और जिला स्तर की स्वीकृति। जबकि 1 वर्ष के बाद पंजीकरण पर ₹100 शुल्क और DM/SDM स्तर की अनुमति आवश्यक होगी
नाम दर्ज कराने की भी समय सीमा
यदि किसी बच्चे का जन्म बिना नाम के दर्ज हो जाता है, तो माता-पिता को 12 महीने के भीतर नाम दर्ज कराना होगा। यदि यह अवधि निकल जाती है, तो 15 वर्ष तक निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क के साथ नाम जोड़ने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इससे रिकॉर्ड में पारदर्शिता और सुधार सुनिश्चित किया जाएगा।
डिजिटल रिकॉर्ड और सेवा शुल्क
नई नियमावली में डिजिटल रिकॉर्ड की खोज और प्रमाण पत्र से जुड़े शुल्क भी निर्धारित किए गए हैं। एक रिकॉर्ड की खोज के लिए ₹20, प्रमाण पत्र के लिए ₹50 और अनुपलब्धता प्रमाण पत्र के लिए ₹20 शुल्क तय किया गया है। इससे पूरी प्रणाली को एक मानक ढांचे में लाने का प्रयास किया गया है।
रिकॉर्ड होंगे स्थायी और सुरक्षित
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जन्म, मृत्यु और मृत-जन्म से जुड़े सभी रिकॉर्ड स्थायी अभिलेख होंगे। इन्हें किसी भी स्थिति में नष्ट नहीं किया जाएगा। यह कदम भविष्य में कानूनी और सामाजिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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