भारत के मिसाइल कार्यक्रम पर बढ़ी नजर
पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित रणनीतिक अध्ययन संस्थान ने भारत के हालिया मिसाइल परीक्षणों को लेकर चिंता जताई है। थिंक टैंक का कहना है कि भारत लगातार लंबी दूरी की मिसाइलों, समुद्र आधारित परमाणु क्षमता और आधुनिक हथियार प्रणालियों पर तेजी से काम कर रहा है। विशेष रूप से अग्नि-5 और पनडुब्बी से दागी जाने वाली मिसाइल प्रणालियों को लेकर पाकिस्तान चिंतित है।
भारत का क्या है रुख?
भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता रहा है कि उसकी रक्षा नीति 'विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता' पर आधारित है। भारत का कहना है कि मिसाइल परीक्षण और आधुनिक सैन्य तकनीक का विकास देश की सुरक्षा जरूरतों का हिस्सा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भारत अपनी सीमाओं और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आधुनिक रक्षा प्रणाली विकसित कर रहा है, ताकि किसी भी संभावित खतरे का प्रभावी जवाब दिया जा सके।
अहम परीक्षण क्षेत्र
पिछले कुछ वर्षों में बंगाल की खाड़ी भारत के लिए प्रमुख मिसाइल परीक्षण क्षेत्र के रूप में उभरी है। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में मौजूद परीक्षण सुविधाओं के कारण यहां कई उन्नत मिसाइलों का परीक्षण किया गया है। भारत ने हाल के वर्षों में अग्नि श्रृंखला, ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, हाइपरसोनिक तकनीक और लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइलों पर तेजी से काम किया है।
चीन भी रख रहा नजर
भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता पर चीन भी लगातार नजर बनाए हुए है। हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की सक्रियता और आधुनिक सैन्य तैयारी को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की अगुवाई में भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई उन्नत रक्षा परियोजनाओं पर काम किया है। सरकार का फोकस आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली और आधुनिक तकनीक के विकास पर है।

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