राज्य सरकार इस अभियान को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी में है। राजस्व विभाग का मानना है कि जमीन से जुड़े विवादों के कारण गांवों और शहरों में लगातार तनाव की स्थिति बनती है। इसी वजह से अब रिकॉर्ड को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
जमीन रिकॉर्ड का सत्यापन
भूमि सर्वे को अधिक आधुनिक बनाने के लिए अब डिजिटल तकनीक और AI का उपयोग किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य सरकारी जमीनों की सही पहचान करना और रिकॉर्ड को ऑनलाइन सिस्टम में सुरक्षित रखना है। अधिकारियों के अनुसार नई तकनीक से फर्जी कागजात और अवैध कब्जों की पहचान करना आसान होगा। सरकार चाहती है कि भविष्य में जमीन संबंधी मामलों में लोगों को कम परेशानी हो और रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध हो सके।
2027 तक सर्वे पूरा करने का लक्ष्य
राजस्व विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि सर्वे कार्य में तेजी लाई जाए। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती भी की जाएगी। सरकार ने यह भी साफ किया है कि काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक बिहार के सभी जिलों में भूमि सर्वे का कार्य पूरा करना है ताकि पुराने विवादों का समाधान किया जा सके।
पुराने रिकॉर्ड नहीं मिलने से बढ़ी चुनौती
भूमि सर्वे के दौरान कई गांवों के पुराने खतियान और दस्तावेज नहीं मिल पा रहे हैं। इससे सर्वे प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि जिनके पास पुराने जमीन संबंधी कागजात हैं, वे विभाग को उपलब्ध कराएं। इसके अलावा जमीन मालिकों से स्वघोषणा के आधार पर भी जानकारी ली जा रही है, ताकि रिकॉर्ड अपडेट करने में आसानी हो सके।
अब ऑनलाइन ही मिलेंगे जमीन से जुड़े दस्तावेज
सरकार ने भू-अभिलेख व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाने का निर्णय लिया है। अब जमीन से जुड़े रिकॉर्ड केवल ऑनलाइन माध्यम से जारी किए जाएंगे। इससे दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे और फर्जीवाड़े की संभावना कम होगी। ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर भी कम लगाने पड़ेंगे और काम तेजी से हो सकेगा।
लंबित मामलों को निपटाने के लिए बढ़ाया गया काम का समय
भूमि सर्वे और दाखिल-खारिज से जुड़े कई आवेदन लंबित होने के कारण विभाग ने कर्मचारियों को अतिरिक्त समय तक काम करने के निर्देश दिए हैं। सुबह और शाम अलग से ड्यूटी लगाकर लंबित मामलों को जल्द पूरा करने की कोशिश की जा रही है। सरकार का कहना है कि यह अभियान बिहार में जमीन विवाद कम करने और लोगों को स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।

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