बता दें की ये नई दरें 16 मई 2026 से प्रभावी हो गई हैं। सरकार का यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू ईंधन आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। माना जा रहा है कि इससे देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
पेट्रोल पर पहली बार लगाया गया शुल्क
इस बार सबसे बड़ा बदलाव पेट्रोल को लेकर किया गया है। अब पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। यह पहली बार है जब पेट्रोल को भी इस व्यवस्था के दायरे में लाया गया है। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल निर्यात से रिफाइनरियों को अभी भी अच्छा लाभ मिल रहा है। ऐसे में घरेलू बाजार में संतुलन बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी समझा गया।
डीजल और विमान ईंधन पर भी नई दरें लागू
नई अधिसूचना के अनुसार डीजल के निर्यात पर अब 16.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगेगा। वहीं विमान ईंधन यानी एटीएफ पर यह दर 16 रुपये प्रति लीटर तय की गई है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि इन बदलावों का असर घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ेगा। यानी आम उपभोक्ताओं को फिलहाल तेल की खुदरा कीमतों में किसी बदलाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।
क्या होता है विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क
सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों के आधार पर हर दो सप्ताह में इस शुल्क की समीक्षा करती है। जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तब कंपनियां निर्यात से अधिक मुनाफा कमाने लगती हैं। ऐसी स्थिति में घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसे रोकने के लिए सरकार निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाती है ताकि कंपनियां जरूरत से ज्यादा ईंधन विदेश न भेजें।
घरेलू आपूर्ति बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता
सरकार का कहना है कि उसका मुख्य उद्देश्य देश में पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले से घरेलू बाजार में ईंधन संकट की आशंका कम होती है और तेल कंपनियों के निर्यात पर भी संतुलन बना रहता है।

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