पहले चरण में इन शहरों को मिलेगी सुविधा
सरकार पहले चरण में श्रीनगर, पटना, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज जैसे शहरों में वाटर मेट्रो सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके बाद दूसरे चरण में असम के तेजपुर और डिब्रूगढ़ में भी इस परियोजना का विस्तार किया जाएगा। इन शहरों का चयन वहां उपलब्ध जलमार्गों और यातायात की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
कोच्चि मॉडल की सफलता से मिली प्रेरणा
सरकार ने यह फैसला कोच्चि वाटर मेट्रो की सफलता के बाद लिया है। कोच्चि में वाटर मेट्रो ने लोगों को तेज और सुविधाजनक परिवहन विकल्प दिया है, जिससे सड़क यातायात का दबाव कम हुआ है। अब इसी मॉडल को देश के अन्य शहरों में लागू करने की योजना बनाई जा रही है।
कम लागत में बेहतर परिवहन व्यवस्था
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि वाटर मेट्रो सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पारंपरिक मेट्रो या सड़क परियोजनाओं की तुलना में कम लागत आती है। चूंकि इसमें मौजूदा जलमार्गों का उपयोग किया जाता है, इसलिए जमीन अधिग्रहण और भारी निर्माण की जरूरत कम पड़ती है। इसके अलावा, संचालन खर्च भी अपेक्षाकृत कम होता है, जिससे यह प्रणाली आर्थिक और पर्यावरण दोनों दृष्टि से लाभकारी मानी जा रही है।
शहरों में ट्रैफिक कम करने में मदद
सरकार का मानना है कि वाटर मेट्रो सेवा शुरू होने से बड़े शहरों में सड़क पर वाहनों का दबाव कम होगा। इससे प्रदूषण में कमी आने के साथ-साथ यात्रा समय भी घटेगा। यह परियोजना विशेष रूप से उन शहरों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, जहां नदियां और जलमार्ग पहले से मौजूद हैं।
व्यवहारिकता अध्ययन लगभग पूरा
भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने इस परियोजना की व्यवहारिकता जांचने की जिम्मेदारी कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड को सौंपी थी। अब तक 18 में से 17 शहरों की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, जबकि लक्षद्वीप की रिपोर्ट अभी लंबित है। इन अध्ययनों में यात्रियों की संभावित संख्या, आर्थिक लाभ, परिवहन नेटवर्क से जुड़ाव और संचालन व्यवस्था जैसे पहलुओं का आकलन किया गया है।

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