हर प्रशिक्षण बैच में मिलेगा आरक्षण
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के तहत चलने वाले सभी शॉर्ट टर्म स्किल ट्रेनिंग कार्यक्रमों में अब प्रत्येक बैच में दिव्यांगजनों के लिए 5 प्रतिशत सीटें अनिवार्य रूप से आरक्षित रहेंगी। सरकार का मानना है कि इससे दिव्यांग युवाओं को प्रशिक्षण प्राप्त करने और रोजगार पाने में आसानी होगी।
एसिड अटैक को विशेष प्राथमिकता
सरकार ने एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत एसिड अटैक पीड़ितों को दिव्यांग श्रेणी में शामिल किया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उन्हें प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए गए हैं। यदि कोई पात्र महिला प्रशिक्षण लेना चाहती है, तो उसका पंजीकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
जिलों में दिए गए विशेष निर्देश
मिशन निदेशक की ओर से सभी जिलों की जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों को निर्देश दिए गए हैं कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में बनने वाले प्रशिक्षण बैचों में आरक्षित सीटों पर पात्र लाभार्थियों का चयन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही महिला कल्याण विभाग और बाल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं की सूची तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाओं को योजना का लाभ मिल सके।
आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर
राज्य सरकार लगातार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने पर जोर दे रही है। सरकार का उद्देश्य है कि विशेष जरूरत वाले लोग भी प्रशिक्षण लेकर रोजगार प्राप्त कर सकें और सम्मान के साथ आत्मनिर्भर जीवन जी सकें। यह पहल केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

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