केंद्र सरकार ने बढ़ाई सख्ती, चांदी के आयात पर नए नियम लागू

नई दिल्ली। भारत सरकार ने कीमती धातुओं के आयात को लेकर एक और बड़ा कदम उठाया है। अब चांदी के आयात पर सख्ती बढ़ाते हुए नई नीति लागू कर दी गई है, जिसके तहत चांदी की सिल्लियों की स्थिति को ‘मुक्त’ से बदलकर ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाल दिया गया है। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

सोने-चांदी के आयात पर सरकार का कड़ा रुख

सरकारी आदेश के अनुसार, सरकार सोने और चांदी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के बाहरी आर्थिक दबाव को कम करना और आयात पर निगरानी को मजबूत करना है। हाल के दिनों में सरकार ने इस दिशा में कई कड़े नियम लागू किए हैं, जिनमें आयात सीमा और अनुपालन शर्तों को और सख्त करना शामिल है।

सोने के आयात पर भी लगे नए नियम

सरकार ने सोने के आयात को लेकर भी नई पाबंदियां लगाई हैं। ‘एडवांस ऑथराइजेशन’ (AA) स्कीम के तहत अब सोने के आयात की अधिकतम सीमा 100 किलो तय कर दी गई है। इसके साथ ही पहली बार आवेदन करने वाले आयातकों की यूनिट का फिजिकल इंस्पेक्शन अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि उत्पादन क्षमता और वास्तविकता की पुष्टि की जा सके।

निर्यात से जुड़ी शर्तें भी कड़ी

नई व्यवस्था के अनुसार, अब सोने के आयात की मंजूरी सीधे निर्यात प्रदर्शन से जुड़ गई है। यानी जब तक पिछले आवंटन के तहत तय निर्यात लक्ष्य का कम से कम 50% पूरा नहीं किया जाएगा, तब तक नया आयात मंजूर नहीं होगा। इससे सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आयात केवल जरूरत आधारित हो और निर्यात क्षेत्र को नुकसान न पहुंचे।

हर दो हफ्ते में देनी होगी रिपोर्ट

आयात प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ाने के लिए सरकार ने अब आयातकों के लिए हर पखवाड़े परफॉर्मेंस रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य कर दिया है। यह रिपोर्ट चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित होगी और इसमें आयात व निर्यात से जुड़ी पूरी जानकारी देनी होगी। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

शुल्क और टैक्स में भी बढ़ोतरी

सरकार पहले ही सोने-चांदी पर आयात शुल्क को बढ़ाकर 15% कर चुकी है। इसके अलावा 3% IGST भी लागू है। इन कदमों का मकसद अनावश्यक आयात को रोकना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव को कम करना है।

क्यों उठाया गया यह कदम?

जानकारों के अनुसार, हाल के वर्षों में भारत का कीमती धातुओं का आयात तेजी से बढ़ा है। हालांकि मात्रा में गिरावट आई है, लेकिन मूल्य में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार का मानना है कि इस तरह की सख्त नीतियों से आयात पर बेहतर नियंत्रण होगा और देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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