नई व्यवस्था के तहत प्रति हेक्टेयर अधिकतम पांच बोरी डीएपी और सात बोरी यूरिया देने का प्रावधान किया गया है। कृषि विभाग ने सभी जिलों में इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। नई व्यवस्था लागू होने से छोटे और मध्यम किसानों को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।
फार्मर आईडी के आधार पर मिलेगा खाद
कृषि विभाग के अनुसार अब किसानों को उर्वरक खरीदते समय किसान पहचान पत्र यानी फार्मर आईडी दिखानी होगी। इसी के आधार पर उनकी जमीन का रिकॉर्ड देखा जाएगा और उसी हिसाब से खाद का वितरण किया जाएगा। हालांकि जिन किसानों के पास अभी फार्मर आईडी उपलब्ध नहीं है, उन्हें भी जमीन संबंधी दस्तावेजों के आधार पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे जरूरतमंद किसानों तक सही मात्रा में खाद पहुंच सकेगी और फर्जी खरीद पर रोक लगेगी।
पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है उर्वरक
कृषि विभाग का दावा है कि खरीफ सीजन को देखते हुए प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है। विभाग के अनुसार इस समय लाखों टन यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य उर्वरक का स्टॉक मौजूद है। सरकार का कहना है कि केंद्र से लगातार उर्वरक की आपूर्ति की जा रही है ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।
कालाबाजारी रोकने पर जोर
हर साल खेती के मौसम में खाद की कालाबाजारी और कृत्रिम कमी की शिकायतें सामने आती हैं। इसे रोकने के लिए सरकार ने जिलों में निगरानी समितियां बनाने के निर्देश दिए हैं। ये समितियां उर्वरक बिक्री केंद्रों पर नजर रखेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि किसानों को तय मात्रा में ही खाद मिले।
संतुलित उपयोग की अपील
कृषि विभाग ने किसानों से जरूरत के अनुसार और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के मुताबिक उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल करने की अपील की है। विभाग का कहना है कि अधिक मात्रा में खाद का उपयोग फसलों और मिट्टी दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

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