घोटाले के बाद सरकार का बड़ा एक्शन
पिछले वर्षों में चित्रकूट कोषागार में मृत पेंशनरों के खातों में अवैध लेन-देन और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया था। जांच में लगभग 43.13 करोड़ रुपये के गबन की बात उजागर हुई, जिसके बाद कई गिरफ्तारियां भी हुईं और सैकड़ों बैंक खाते सीज किए गए। इसी घटना को आधार बनाकर सरकार ने पूरी प्रणाली को मजबूत करने का फैसला लिया है।
बैंक खाता बदलने की प्रक्रिया आसान नहीं
नई व्यवस्था के तहत अब पेंशनर्स के बैंक खाते में किसी भी प्रकार का बदलाव सीधे मुख्य कोषाधिकारी (CTO) द्वारा नहीं किया जा सकेगा। पहले यह अधिकार स्थानीय स्तर पर ही इस्तेमाल हो जाता था, जिससे गड़बड़ी की आशंका बनी रहती थी। अब इस प्रक्रिया में कई स्तरों की जांच जरूरी होगी। मुख्य या वरिष्ठ कोषाधिकारी केवल संस्तुति देंगे, जबकि अंतिम अनुमोदन मंडलीय अपर निदेशक से लेना अनिवार्य होगा।
दस्तावेजों की जांच होगी अनिवार्य
नए नियमों के अनुसार, बैंक खाता बदलने के लिए पेंशनर्स को कई दस्तावेज देने होंगे। इनमें नए और पुराने बैंक खाते की स्वप्रमाणित कॉपी शामिल होगी। यदि बैंक शाखा बदली जा रही है, तो पुरानी शाखा का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी जरूरी होगा। इसके बिना आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पूरी प्रक्रिया डिजिटल और चरणबद्ध
आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित पटल सहायक पहले पेंशनर के रिकॉर्ड की जांच करेगा। इसके बाद मामला सहायक कोषाधिकारी और मुख्य कोषाधिकारी के पास जाएगा। सभी स्तरों से संस्तुति के बाद फाइल को ई-मेल के जरिए अपर निदेशक के पास भेजा जाएगा। अंतिम मंजूरी के बाद ही खाता परिवर्तन किया जा सकेगा।
पेंशन व्यवस्था में व्यापक सुधार
नई एसओपी सिर्फ बैंक खाता परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पेंशन भुगतान आदेश (PPO), पारिवारिक पेंशन, नियमित पेंशन भुगतान, पेंशन बकाया और जीवित प्रमाण पत्र जैसी सभी प्रक्रियाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसका उद्देश्य पूरे सिस्टम को एकरूप और पारदर्शी बनाना है।
पारदर्शिता और सुरक्षा होगी मजबूत
कोषागार निदेशक वीके सिंह के अनुसार, यह पहली बार है जब कोषागारों के लिए विस्तृत एसओपी तैयार की गई है। इससे पहले सभी प्रक्रियाएं अलग-अलग शासनादेशों पर आधारित थीं, जिससे कई बार भ्रम की स्थिति बनती थी। अब सभी नियमों को एक ढांचे में समाहित कर दिया गया है।

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