8वें वेतन आयोग: सैलरी-पेंशन और DA को लेकर बड़ी खुशखबरी

राशिफल। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। आयोग की महत्वपूर्ण बैठकों का दौर शुरू हो चुका है, जिससे लाखों कर्मचारियों की उम्मीदें फिर बढ़ गई हैं। देशभर के सरकारी कर्मचारी अब नई सैलरी संरचना, फिटमेंट फैक्टर, पेंशन सुधार और महंगाई भत्ते (DA) को लेकर होने वाले फैसलों पर नजर बनाए हुए हैं।

हैदराबाद में शुरू हुई अहम बैठकें

8वें वेतन आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई में आयोग की टीम हैदराबाद में कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों से चर्चा कर रही है। इन बैठकों में कर्मचारियों की मांगों, सुझावों और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों पर विस्तार से विचार किया जा रहा है। हैदराबाद के बाद विशाखापत्तनम, श्रीनगर और लेह में भी परामर्श बैठकें प्रस्तावित हैं।

फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग तेज

इस समय सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। कई कर्मचारी संगठन इसे 2.57 से बढ़ाकर 3.83 करने की मांग कर रहे हैं। यदि इस मांग पर सहमति बनती है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिटमेंट फैक्टर बढ़ने से कर्मचारियों की कुल मासिक आय पर सीधा असर पड़ेगा।

न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ाने की मांग

कर्मचारी यूनियनों ने न्यूनतम बेसिक सैलरी को मौजूदा 18 हजार रुपये से बढ़ाकर 69 हजार रुपये करने की मांग रखी है। इसके साथ ही सालाना वेतन वृद्धि दर को भी बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और घरेलू खर्चों को देखते हुए वेतन संरचना में बड़ा बदलाव जरूरी हो गया है।

पेंशन और DA मर्जर पर भी चर्चा

बैठकों में पेंशन सुधार और महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी में शामिल करने के मुद्दे पर भी चर्चा हो रही है। कई संगठनों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करने और पेंशन समानता की मांग भी उठाई है। पेंशनर्स का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच पेंशन में सुधार बेहद जरूरी हो गया है।

मेमोरेंडम जमा करने की तारीख बढ़ी

आयोग ने सुझाव और मांग पत्र जमा करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 मई 2026 कर दी है। इससे कर्मचारी संगठनों को अपनी बात विस्तार से रखने का अतिरिक्त समय मिल गया है। वहीं, आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर केंद्र सरकार को सौंपनी होगी। इसके बाद सरकार तय करेगी कि सैलरी, पेंशन और भत्तों में कितना बदलाव किया जाएगा।

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