नई गाइडलाइन के अनुसार 21 मई से जमीन निबंधन की नई प्रक्रिया लागू कर दी जाएगी। इसके तहत किसी भी विक्रेता को जमीन बेचने से पहले संबंधित अंचल कार्यालय से जांच रिपोर्ट प्राप्त करनी होगी। यानी अब जमीन रजिस्ट्री से पहले प्रशासनिक सत्यापन जरूरी होगा।
सीओ की जांच रिपोर्ट के बाद ही होगी रजिस्ट्री
नई व्यवस्था में जैसे ही विक्रेता जमीन बिक्री से जुड़े दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करेगा, उसे संबंधित अंचल की जानकारी देनी होगी। इसके बाद मामला सीधे संबंधित सीओ यानी अंचल अधिकारी के पास पहुंच जाएगा। सीओ को यह जांच करनी होगी कि जमीन निजी है या सरकारी, उस पर किसी प्रकार का विवाद तो नहीं है, दस्तावेज सही हैं या नहीं और विक्रेता का दावा वैध है या नहीं। जांच पूरी होने के बाद सीओ अपनी रिपोर्ट देंगे और तभी जमीन की बिक्री की अनुमति मिल सकेगी। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जांच रिपोर्ट अधिकतम 10 दिनों के भीतर जारी की जाए, ताकि लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
समय पर रिपोर्ट नहीं देने पर जवाबदेही तय
नई व्यवस्था में आम लोगों को राहत देने के लिए एक विशेष प्रावधान भी रखा गया है। यदि किसी कारण से संबंधित अधिकारी तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट जारी नहीं करते हैं, तो पोर्टल पर अपलोड की गई जानकारी को ही आधार मानकर आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। हालांकि ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी, ताकि लापरवाही और देरी पर नियंत्रण रखा जा सके। इससे जमीन खरीदने वालों को लंबे इंतजार से राहत मिलने की उम्मीद है।
खरीदारों को मिलेगा पूरा रिकॉर्ड
सरकार की नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा जमीन खरीदने वाले लोगों को होगा। अब रजिस्ट्री से पहले ही खरीदार को जमीन की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। यदि किसी व्यक्ति को किसी जमीन को लेकर संदेह होता है, तो वह अंचल कार्यालय में आवेदन देकर उस जमीन का पूरा विवरण प्राप्त कर सकता है। इस कदम से जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनने की उम्मीद है। साथ ही विवादित और फर्जी जमीन के मामलों में भी कमी आ सकती है।
फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक
राज्य में लंबे समय से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन बिक्री, सरकारी जमीन की रजिस्ट्री और विवादित संपत्ति के सौदों की शिकायतें सामने आती रही हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे मामलों पर सख्ती से रोक लगाने की तैयारी की गई है। भूमि निबंधन विभाग के अनुसार सभी संबंधित अधिकारियों को नई प्रणाली का प्रशिक्षण दिया जा चुका है और उन्हें लॉगिन आईडी तथा पासवर्ड भी उपलब्ध करा दिए गए हैं, ताकि नई व्यवस्था बिना किसी तकनीकी परेशानी के लागू हो सके।

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