जल संरक्षण और सिंचाई का मजबूत समाधान
खेत तालाब योजना का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल को संरक्षित कर किसानों को सिंचाई के लिए स्थायी स्रोत उपलब्ध कराना है। लगातार घटते भूजल स्तर और बढ़ती सूखे की समस्या के बीच यह योजना बेहद उपयोगी साबित हो रही है। खेतों में बनाए जाने वाले तालाब बारिश का पानी इकट्ठा करते हैं, जिससे फसलों को समय पर पानी मिलता है और खेती की निर्भरता मौसम पर कम हो जाती है। इससे किसानों की फसल उत्पादन क्षमता में भी सुधार होता है।
सरकार दे रही 50% तक सब्सिडी
इस योजना के तहत किसानों को तालाब निर्माण पर भारी सब्सिडी दी जा रही है। एक मानक खेत तालाब के निर्माण की अनुमानित लागत लगभग 1,05,000 रुपये है, जिसमें सरकार 50% यानी 52,500 रुपये तक की सहायता देती है। यह सहायता सीधे किसानों के बैंक खाते में दी जाती है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी तालाब बनवाना आसान हो गया है।
खेती के साथ अतिरिक्त आय
यह योजना सिर्फ सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के लिए अतिरिक्त आय का साधन भी बन रही है। खेत तालाब में किसान मत्स्य पालन, सिंघाड़े की खेती और मोती उत्पादन जैसी गतिविधियां कर सकते हैं। इससे किसानों की आय के कई स्रोत बनते हैं और वे आर्थिक रूप से मजबूत होते हैं। इसके अलावा सरकार स्प्रिंकलर सेट पर 80 से 90 प्रतिशत तक और पंपसेट पर भी सब्सिडी उपलब्ध करा रही है, जिससे खेती की लागत कम हो रही है।
आवेदन और प्रक्रिया की खास बातें
आवेदन के लिए किसान का रजिस्ट्रेशन जरूरी है।
आवेदन के 15 दिनों के भीतर सत्यापन किया जाता है।
मंजूरी के बाद 30 दिनों के भीतर तालाब निर्माण पूरा करना होता है।
ऑनलाइन आवेदन के समय 1000 रुपये टोकन मनी जमा करनी होती है, जो बाद में वापस मिल जाती है।

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