इन योजनाओं का उद्देश्य है कि कोई भी छात्र पैसों की कमी के कारण अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़े। इन योजनाओं का बड़ा हिस्सा नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) के माध्यम से संचालित किया जाता है, जहां छात्र एक ही प्लेटफॉर्म पर आवेदन, दस्तावेज सत्यापन और स्कॉलरशिप की स्थिति देख सकते हैं।
1. पीएम यशस्वी योजना
यह योजना मुख्य रूप से OBC, EBC और DNT वर्ग के छात्रों के लिए शुरू की गई है। इसका उद्देश्य मेधावी छात्रों को पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना का लक्ष्य वंचित वर्ग के छात्रों को शिक्षा में आगे बढ़ने के समान अवसर देना है।
इस योजना के तहत छात्रों को:
स्कूल और उच्च शिक्षा स्तर पर सहायता मिलती है
1.25 लाख रुपये तक की स्कॉलरशिप प्रदान की जाती है
कुछ मामलों में 2 लाख रुपये तक की फीस सहायता और लैपटॉप जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं।
2. पीएम विद्यालक्ष्मी योजना
यह योजना छात्रों को बिना किसी गारंटी या गिरवी के शिक्षा लोन उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। इस योजना का उद्देश्य छात्रों को आर्थिक बाधाओं से मुक्त कर उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है। हालांकि, परिवार की आय सीमा लगभग 4.5 लाख रुपये तक होने पर लाभ मिलेगा।
इसकी मुख्य विशेषताएं:
बिना गारंटी एजुकेशन लोन की सुविधा।
8 लाख रुपये तक के लोन पर ब्याज सब्सिडी।
उच्च संस्थानों में पढ़ाई के लिए बैंक आसानी से लोन देते हैं।
आवेदन प्रक्रिया विद्या लक्ष्मी पोर्टल के माध्यम से होती है।
3. पीएम उच्च शिक्षा प्रोत्साहन योजना
यह योजना गरीब और मेधावी छात्रों को कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर सहायता प्रदान करती है। पात्रता के लिए 12वीं में कम से कम 80% अंक जरूरी, परिवार की आय सीमित होनी चाहिए (लगभग 4.5 लाख रुपये तक), नियमित कोर्स में एडमिशन अनिवार्य है।
इसमें मिलने वाला लाभ:
स्नातक के पहले तीन वर्षों में 12,000 रुपये प्रति वर्ष।
स्नातकोत्तर (Post Graduation) में 20,000 रुपये प्रति वर्ष।
मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे कोर्स में चौथे-पांचवें वर्ष तक भी सहायता।
4. यूजीसी पोस्ट ग्रेजुएट स्कॉलरशिप योजना
यह योजना विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा चलाई जाती है और मुख्य रूप से पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्रों के लिए है। यह योजना उच्च शिक्षा और रिसर्च को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाती है।
इसके तहत:
मेरिट के आधार पर चयन किया जाता है।
लाभार्थी की उम्र 30 वर्ष से कम होनी चाहिए।
2 साल के कोर्स के लिए लगभग 3 लाख रुपये तक सहायता।

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