रजिस्ट्री रिकॉर्ड और लेन-देन की जांच
आयकर विभाग की आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण इकाई (I&CI) की टीम विभिन्न जिलों के रजिस्ट्री कार्यालयों में दर्ज दस्तावेजों की बारीकी से समीक्षा कर रही है। वित्तीय वर्ष 2021-22 से लेकर अब तक के संपत्ति सौदों को जांच के दायरे में लिया गया है। अधिकारियों द्वारा यह देखा जा रहा है कि संपत्ति खरीद-फरोख्त के दौरान टीडीएस (TDS), पैन कार्ड विवरण और स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन (SFT) जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं।
बड़े सौदों पर विशेष नजर
नियमों के अनुसार, यदि किसी संपत्ति का मूल्य 30 लाख रुपये या उससे अधिक है, तो उसकी जानकारी रजिस्ट्री कार्यालय को एसएफटी के तहत आयकर विभाग को देनी होती है। वहीं 50 लाख रुपये या उससे अधिक की संपत्ति पर खरीदार द्वारा विक्रेता को किए गए भुगतान पर 1 प्रतिशत टीडीएस काटना अनिवार्य होता है। इसके अलावा, जिन सौदों का मूल्य 10 लाख रुपये या उससे अधिक है और खरीदार के पास पैन कार्ड नहीं है, वहां फॉर्म-60 भरना जरूरी होता है, जिसमें व्यक्ति की पहचान और पता दर्ज किया जाता है।
जांच में सामने आईं अनियमितताएं
प्रारंभिक जांच में कई खामियां उजागर हुई हैं। कुछ मामलों में पैन कार्ड का विवरण दर्ज नहीं किया गया, तो कई सौदों में टीडीएस की कटौती ही नहीं की गई। इसके साथ ही कैपिटल गेन टैक्स की देयता को भी नजरअंदाज करने के मामले सामने आए हैं। कुछ बिल्डरों द्वारा कृषि भूमि को शहरी क्षेत्र में बड़े सौदों के रूप में दिखाकर कर लाभ लेने की कोशिश भी सामने आई है। ऐसे मामलों में टैक्स नियमों के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।
संदिग्ध लेन-देन पर आयकर की नजर
आयकर विभाग अब केवल रजिस्ट्री रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि कई अन्य वित्तीय गतिविधियों पर भी निगरानी कर रहा है। इनमें संदिग्ध नकद जमा, डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टोकरेंसी लेन-देन, डिविडेंड और ब्याज से आय, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेश, एफडी-आरडी खाते, विदेशी मुद्रा लेन-देन और दो लाख रुपये से अधिक की नकद प्राप्तियां शामिल हैं।

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