राज्य ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह के अनुसार, आज के समय में इंटरनेट भी उतनी ही जरूरी सुविधा बन चुका है जितनी सड़क, बिजली और पानी। इसी सोच के साथ इस प्रोजेक्ट को तैयार किया गया है, ताकि गांवों को डिजिटल रूप से मजबूत बनाया जा सके।
गांवों तक पहुंचेगा हाई स्पीड इंटरनेट
‘प्रोजेक्ट गंगा’ के तहत पहले चरण में प्रदेश के 21 जिलों में हाई स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से प्रदेश की सभी 57,000 ग्राम पंचायतों और लगभग 8,000 न्याय पंचायतों तक विस्तार दिया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं को मजबूत करना और लोगों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है।
1 लाख से अधिक रोजगार के अवसर
इस परियोजना से ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे। सरकार की योजना के तहत 8 से 10 हजार डिजिटल सेवा प्रदाता (DSP) तैयार किए जाएंगे। इनसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 1 लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना जताई जा रही है। खास बात यह है कि इस योजना में महिलाओं को 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी देने का लक्ष्य रखा गया है।
गांव के युवा बनेंगे डिजिटल उद्यमी
इस योजना के तहत चयनित युवाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर उन्हें डिजिटल उद्यमी के रूप में तैयार किया जाएगा। ये युवा अपने ही गांव में रहकर इंटरनेट सेवा और डिजिटल सुविधाओं के जरिए आय अर्जित कर सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती स्तर पर डिजिटल सेवा प्रदाताओं की मासिक आय लगभग 20 हजार रुपये तक पहुंच सकती है, जो कनेक्शन बढ़ने के साथ 1 लाख रुपये प्रति माह तक भी जा सकती है।
कम लागत, आसान निवेश मॉडल
इस परियोजना में ग्राम पंचायत स्तर पर कुल लागत लगभग 5.53 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसमें से 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत उपलब्ध कराया जाएगा। लाभार्थी को केवल लगभग 50 हजार रुपये की मार्जिन मनी लगानी होगी, जिससे ग्रामीण युवाओं के लिए यह एक आसान और सुलभ अवसर बन जाता है।
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