यूपी में शिक्षकों को बड़ी राहत, सरकार दे सकती है खुशखबरी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों को लेकर एक बड़ा और राहत भरा संकेत सामने आया है। टीईटी अनिवार्यता के कारण प्रभावित हो रही सेवा सुरक्षा के मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिक्षक प्रतिनिधिमंडल की बातचीत को सकारात्मक माना जा रहा है। इस मुलाकात के बाद शिक्षकों के बीच उम्मीद की नई किरण जगी है कि जल्द ही सरकार उनकी सेवा सुरक्षा को लेकर कोई ठोस निर्णय ले सकती है।

मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन

शिक्षक संगठनों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि वर्षों से कार्यरत शिक्षकों के अनुभव और योगदान का पूरा सम्मान किया जाएगा। सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की नौकरी और पद सुरक्षित रहें तथा उनके हितों की अनदेखी न हो।

प्रतिनिधिमंडल ने उठाया मुद्दा

यह मामला उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया। प्रतिनिधिमंडल में एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह और राज बहादुर सिंह चंदेल के साथ प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी और संयुक्त महामंत्री अमित सिंह शामिल थे। इस दौरान शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों की कैशलेस चिकित्सा योजना पर मुख्यमंत्री का आभार भी जताया गया।

टीईटी विवाद से बढ़ी चिंता

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद कई वर्षों से कार्यरत शिक्षकों की सेवा को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन गई थी। इसी के समाधान के लिए शिक्षक संगठन ने मांग रखी कि अनुभव के आधार पर वेटेज दिया जाए और विशेष विभागीय टीईटी परीक्षा आयोजित कर समाधान निकाला जाए, जिससे किसी भी शिक्षक की नौकरी पर खतरा न रहे।

सरकार का रुख: अनुभव को मिलेगा महत्व

बैठक के दौरान सरकार की ओर से यह संकेत मिला कि शिक्षकों के लंबे अनुभव और योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार पहले भी इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर चुकी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से देख रही है।

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