बिहार के परिवारों पर बढ़ेगा खर्च का बोझ
बिहार में उज्ज्वला योजना के करोड़ों लाभार्थी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रसोई गैस पर निर्भर हैं। सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या घटने से अब परिवारों को अधिकतर गैस बाजार मूल्य पर खरीदनी पड़ेगी, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे परिवारों के लिए यह फैसला चिंता का कारण बन गया है।
खपत और वित्तीय संतुलन
सरकार की ओर से इस बदलाव के पीछे औसत गैस खपत और बढ़ते सब्सिडी खर्च को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, कई लाभार्थी तय सीमा से कम गैस का उपयोग करते हैं, जबकि सब्सिडी का बड़ा हिस्सा सरकारी व्यय पर दबाव डालता है। ऐसे में योजना को अधिक “संतुलित और व्यवहारिक” बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
पहले भी घट चुका है कोटा
उज्ज्वला योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी, जब लाभार्थियों को प्रति वर्ष 12 सिलेंडर तक सब्सिडी का लाभ मिलता था। बाद में इसे घटाकर 9 किया गया और अब इसे और कम करके 4 सिलेंडर प्रति वर्ष कर दिया गया है। लगातार हो रहे इन बदलावों से योजना की संरचना में बड़ा परिवर्तन देखा जा रहा है।
सब्सिडी की राशि और व्यवस्था
वर्तमान में सरकार प्रति सिलेंडर लगभग 300 रुपये की सब्सिडी लाभार्थियों के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजती है। यह व्यवस्था पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई थी, ताकि सब्सिडी सीधे लाभार्थी तक पहुंचे।
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