फसल नुकसान पर मिलेगा बेहतर मुआवजा
नई व्यवस्था के तहत बीमित किसानों को फसल क्षति होने पर कृषि लागत के अनुरूप मुआवजा मिलने का प्रावधान रहेगा। इससे किसानों को बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले नुकसान से उबरने में मदद मिलेगी। विशेष बात यह है कि योजना में बीमित भूमि की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है। इसका फायदा छोटे किसानों के साथ-साथ बड़े जोत वाले किसानों को भी मिलेगा।
फसल सहायता की जगह लेगी नई योजना
राज्य में खरीफ 2018 से लागू बिहार राज्य फसल सहायता योजना की जगह अब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की जाएगी। सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर की इस योजना से किसानों को व्यापक सुरक्षा कवरेज और बेहतर लाभ मिल सकेंगे।
किसानों की आर्थिक सुरक्षा होगी मजबूत
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेती लगातार मौसम संबंधी जोखिमों से प्रभावित होती है। ऐसे में बीमा सुरक्षा किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नई योजना लागू होने से किसानों का जोखिम कम होगा और खेती में निवेश करने का भरोसा भी बढ़ेगा।
भूमि मापी शुल्क में हुआ बदलाव
कैबिनेट बैठक में भूमि मापी शुल्क की नई दरों को भी मंजूरी दी गई है। अब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जमीन की मापी के लिए पहले की तुलना में अधिक शुल्क देना होगा। नई व्यवस्था के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति खेसरा मापी शुल्क 1,000 रुपये और अधिकतम 4,000 रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं शहरी क्षेत्रों में प्रति खेसरा 2,000 रुपये और अधिकतम 8,000 रुपये शुल्क लिया जाएगा।
तत्काल मापी के लिए अलग शुल्क
अगर कोई व्यक्ति तत्काल भूमि मापी कराना चाहता है तो उसे सामान्य शुल्क से अधिक राशि देनी होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल मापी के लिए प्रति खेसरा 2,000 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 4,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
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