विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने यंग प्रोफेशनल चयन नीति-2026 को मंजूरी दे दी है। इसके तहत योग्य युवाओं को विभिन्न संस्थानों में तकनीकी और विशेषज्ञ सेवाओं के लिए नियुक्त किया जाएगा। चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और राज्य की आरक्षण नीति का भी पालन किया जाएगा।
तीन श्रेणियों में होगा चयन
यंग प्रोफेशनल की नियुक्ति तीन अलग-अलग श्रेणियों में की जाएगी। पहली श्रेणी वाईपी-1, दूसरी वाईपी-2 और तीसरी वाईपी-3 होगी। प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता और अनुभव संबंधी मानदंड निर्धारित किए गए हैं। वाईपी-1 के लिए डिप्लोमा धारक अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे, जबकि वाईपी-2 के लिए बीटेक और वाईपी-3 के लिए एमटेक योग्यता अनिवार्य होगी। तकनीकी विषयों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले युवाओं को प्राथमिकता मिलने की संभावना है।
आकर्षक मानदेय का प्रावधान
सरकार ने चयनित अभ्यर्थियों के लिए आकर्षक मासिक मानदेय तय किया है। वाईपी-1 को प्रति माह 40 हजार रुपये, वाईपी-2 को 50 हजार रुपये और वाईपी-3 को 60 हजार रुपये तक का भुगतान किया जाएगा। इतना ही नहीं, कार्य प्रदर्शन संतोषजनक रहने पर मानदेय में हर वर्ष अधिकतम 5 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रावधान भी रखा गया है। इससे युवाओं को बेहतर कार्य करने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा।
दो वर्ष का प्रारंभिक कार्यकाल
यंग प्रोफेशनल का चयन शुरुआती तौर पर दो वर्षों के लिए किया जाएगा। इसके बाद कार्य प्रदर्शन और संस्थान की आवश्यकता के आधार पर सेवा अवधि में एक वर्ष का अतिरिक्त विस्तार भी दिया जा सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य योग्य युवाओं को संस्थानों में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना और तकनीकी परियोजनाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाना है।
इन संस्थानों में मिलेगी जिम्मेदारी
चयनित यंग प्रोफेशनल राज्य के कई प्रमुख तकनीकी और वैज्ञानिक संस्थानों में अपनी सेवाएं देंगे। इनमें बिहार काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी, बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लिकेशंस सेंटर, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी, बिहार इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी, स्टेट बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, सब-रीजनल साइंस सेंटर गया तथा अन्य विभागीय संस्थान शामिल हैं।
ऑनलाइन आवेदन से होगी भर्ती
भर्ती प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए आवेदन ऑनलाइन माध्यम से लिए जाएंगे। विभाग स्तर पर गठित चयन समिति आवेदनों की जांच, स्क्रीनिंग और पात्रता सत्यापन की निगरानी करेगी। समिति संस्थानवार आवश्यकता का आकलन कर नियुक्तियों की संख्या भी तय करेगी।

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