इस अभियान का उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को समय पर जांच, परामर्श और आवश्यक चिकित्सीय सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस वर्ष अभियान की थीम 'प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष : सुरक्षित गर्भावस्था, स्वस्थ मां, सशक्त भारत' रखी गई है।
पहली तिमाही की गर्भवतियों के लिए विशेष शिविर
राज्य के सभी 1,277 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और स्वास्थ्य संस्थानों में पहली तिमाही की गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष जांच शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में गर्भावस्था की शुरुआती अवस्था में जरूरी स्वास्थ्य परीक्षण किए जाएंगे, ताकि किसी भी संभावित जोखिम की समय रहते पहचान हो सके। वहीं दूसरी और तीसरी तिमाही की गर्भवती महिलाओं को अनुमंडलीय अस्पतालों, जिला अस्पतालों और फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जांच और परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
हाई रिस्क गर्भवतियों पर विशेष नजर
अभियान के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें विशेष निगरानी में रखा जाएगा। प्रसव के बाद भी 45 दिनों तक मां और नवजात की स्वास्थ्य स्थिति की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना और जटिलताओं को समय रहते नियंत्रित करना है।
77 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जून 2016 से अप्रैल 2026 तक बिहार में 77 लाख 5 हजार 820 से अधिक गर्भवती महिलाएं प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का लाभ उठा चुकी हैं। यह दर्शाता है कि पिछले एक दशक में यह कार्यक्रम राज्य की मातृ स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मिलेगी मजबूती
गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच और समय पर चिकित्सकीय सलाह से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को रोका जा सकता है। यही कारण है कि सरकार अब शुरुआती जांच, जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान और प्रसव के बाद निगरानी पर विशेष ध्यान दे रही है।
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