जमीन मालिकों के लिए खुशखबरी! यूपी में बदलने जा रही है रजिस्ट्री व्यवस्था

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। राज्य सरकार अब ऐसी व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है, जिससे रजिस्ट्री से जुड़े फर्जीवाड़े, बिचौलियों की भूमिका और अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लग सके।

नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिससे दस्तावेजों का स्वतः सत्यापन और रिकॉर्ड का तत्काल ऑनलाइन अपडेट संभव हो सकेगा। इसे जमीन मालिकों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

रजिस्ट्री के साथ ही ऑनलाइन पहुंचेगा रिकॉर्ड

नई प्रस्तावित प्रणाली के अनुसार जैसे ही किसी संपत्ति की रजिस्ट्री होगी, उसकी कॉपी संबंधित विभागों के पोर्टल पर स्वतः पहुंच जाएगी। इससे नामांतरण (म्यूटेशन) की प्रक्रिया भी तेज और सरल हो जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जमीन से जुड़े सभी रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हों, ताकि किसी भी प्रकार की हेराफेरी या रिकॉर्ड में गड़बड़ी की संभावना खत्म की जा सके।

पैन और आधार अनिवार्य, सुरक्षा होगी मजबूत

रिपोर्ट के अनुसार अब हर रजिस्ट्री में पैन कार्ड और आधार कार्ड का विवरण अनिवार्य किया जा रहा है। हालांकि सुरक्षा कारणों से आधार नंबर के केवल अंतिम चार अंक ही रिकॉर्ड में प्रदर्शित किए जाएंगे। इस कदम से पहचान सत्यापन मजबूत होगा और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर होने वाले लेन-देन पर रोक लगेगी।

आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद सख्ती

रिपोर्ट के मुताबिक आयकर विभाग द्वारा की गई जांच में कई जिलों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई थीं। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि कई मामलों में बिना सही दस्तावेजों के बैनामा किया गया। कुछ मामलों में तो उन संपत्तियों की भी रजिस्ट्री कर दी गई, जो पहले से ही आयकर, ईडी या सीबीआई द्वारा अटैच थीं। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता बढ़ी और रजिस्ट्री प्रक्रिया को सुधारने की दिशा में कदम तेज किए गए।

गवाहों के बयान और हस्ताक्षर होंगे जरूरी

नई व्यवस्था के तहत अब रजिस्ट्री के समय केवल दस्तावेज ही नहीं, बल्कि क्रेता, विक्रेता और गवाहों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। सभी पक्षों के हस्ताक्षर के बाद ही रजिस्ट्री को मान्यता दी जाएगी। इससे फर्जी बिक्री, दबाव में किए गए सौदे और विवादित लेन-देन पर रोक लगने की उम्मीद है।

यूनिक प्रॉपर्टी आईडी से जुड़ेंगे भूखंड

सरकार “मैपिंग और यूनिक प्रॉपर्टी आईडी” प्रणाली पर भी काम कर रही है, जिसके तहत हर भूखंड को एक विशिष्ट पहचान नंबर दिया जाएगा। इससे किसी भी संपत्ति का रिकॉर्ड आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा और विवादों में कमी आएगी।

बिचौलियों और फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक

प्रशासन का मानना है कि डिजिटल सिस्टम लागू होने से रजिस्ट्री दफ्तरों में पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों की भूमिका लगभग खत्म हो जाएगी। साथ ही ऑनलाइन आधार सत्यापन और रिकॉर्ड ऑटो-अपडेट सिस्टम से प्रक्रिया तेज और सुरक्षित बनेगी।

जमीन मालिकों को होगा सीधा फायदा

नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन मालिकों को रजिस्ट्री के बाद अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नामांतरण और रिकॉर्ड अपडेट स्वतः हो जाएगा। इससे समय की बचत के साथ-साथ भ्रष्टाचार की संभावना भी कम होगी।

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