कैसे शुरू हुआ नया संघर्ष?
इस संघर्ष की शुरुआत क्षेत्रीय घटनाओं की एक श्रृंखला से जुड़ी बताई जा रही है। पहले लेबनान स्थित संगठन हिजबुल्लाह की ओर से इजराइल पर रॉकेट हमले किए गए। इसके जवाब में इजराइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हवाई हमले किए। हिजबुल्लाह को ईरान का समर्थन प्राप्त माना जाता है, ऐसे में स्थिति तेजी से बिगड़ती चली गई। इसके बाद ईरान ने इजराइल के सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमला कर दिया, जिसे क्षेत्रीय तनाव का बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
इजराइल का जवाबी हमला
इजराइल ने भी देर नहीं की और ईरान के प्रमुख शहरों तेहरान और इसफहान में एयरस्ट्राइक कर दी। इन हमलों के बाद ईरान को अपने प्रमुख हवाई अड्डों में से एक को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा और देश के हवाई क्षेत्र को भी सीमित कर दिया गया। दोनों देशों के बीच सीधा सैन्य टकराव अब स्थिति को बेहद संवेदनशील बना चुका है।
शांति प्रयासों पर फिर संकट
कुछ महीने पहले अमेरिका की मध्यस्थता से एक शांति ढांचे की कोशिश की गई थी, लेकिन मौजूदा घटनाओं ने उस प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों की भूमिका ने इस शांति प्रयास को कमजोर कर दिया है।
क्या यह बड़े युद्ध की शुरुआत है?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल यह स्थिति पूर्ण युद्ध नहीं बल्कि 'स्ट्रेटेजिक डिटरेंस' यानी एक-दूसरे को रोकने और दबाव बनाने की रणनीति है। हालांकि, चिंता इस बात की है कि छोटी-सी गलती भी इसे बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकती है। मिडिल ईस्ट पहले से ही कई राजनीतिक और सैन्य तनावों से जूझ रहा है, ऐसे में हालिया घटनाक्रम बेहद खतरनाक माने जा रहे हैं।
अमेरिका और वैश्विक प्रतिक्रिया
इस संघर्ष पर अमेरिका पर भी दबाव बढ़ता दिख रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन इजराइल को संयम बरतने की सलाह दे रहा है ताकि स्थिति और न बिगड़े। ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देशों ने भी दोनों पक्षों से तुरंत तनाव कम करने की अपील की है। वहीं, पड़ोसी देशों ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था और एयर डिफेंस सिस्टम को अलर्ट पर रखा है।

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