पेंशनभोगी संगठनों का कहना है कि बढ़ती उम्र के साथ जीवन-यापन और स्वास्थ्य संबंधी खर्च लगातार बढ़ते जाते हैं। ऐसे में मौजूदा पेंशन व्यवस्था में बदलाव कर उम्र के अनुसार अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए। यही वजह है कि अब 8वें वेतन आयोग से पहले इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।
क्या है उम्र आधारित पेंशन व्यवस्था की मांग?
सरकारी कर्मचारी संगठनों और नेशनल काउंसिल (जेसीएम) की स्टाफ साइड ने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिसमें उम्र बढ़ने के साथ पेंशन की राशि भी चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने की बात कही गई है। उनका तर्क है कि सेवानिवृत्ति के कई वर्षों बाद वरिष्ठ नागरिकों की आवश्यकताएं बदल जाती हैं और चिकित्सा खर्चों में काफी वृद्धि हो जाती है।
क्यों जरूरी मानी जा रही है यह मांग?
पेंशनभोगी संगठनों का कहना है कि 70, 80 और 90 वर्ष की आयु पार करने वाले लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं, दवाइयों और देखभाल पर अधिक खर्च करना पड़ता है। इसलिए उम्र बढ़ने के साथ पेंशन में भी अतिरिक्त वृद्धि की व्यवस्था होनी चाहिए। उनका मानना है कि इससे बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने में मदद मिलेगी।
प्रस्तावित फॉर्मूला क्या कहता है?
पेंशनभोगी संगठनों द्वारा सुझाए गए प्रस्ताव के अनुसार हर पांच वर्ष की आयु वृद्धि पर पेंशन में अतिरिक्त बढ़ोतरी की जा सकती है।
65 वर्ष की आयु पर अंतिम मूल वेतन का 70 प्रतिशत
70 वर्ष की आयु पर 75 प्रतिशत
75 वर्ष की आयु पर 80 प्रतिशत
80 वर्ष की आयु पर 85 प्रतिशत
85 वर्ष की आयु पर 90 प्रतिशत
90 वर्ष या उससे अधिक आयु पर 100 प्रतिशत
यदि ऐसा मॉडल लागू होता है तो अधिक उम्र वाले पेंशनभोगियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।

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