राज्य में बढ़ेगा यातायात पुलिस का दायरा
वर्तमान में बिहार के 12 यातायात जिलों के अंतर्गत 15 यातायात थाने कार्यरत हैं, जिनके लिए लगभग 2750 पद स्वीकृत हैं। इसके अलावा राज्य में 28 नए यातायात थानों की स्थापना का प्रस्ताव भी विचाराधीन है, जिसके लिए 4215 अतिरिक्त पदों के सृजन की योजना बनाई गई है। सरकार को उम्मीद है कि इससे सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण और दुर्घटनाओं की रोकथाम के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।
अलग-अलग पदों के लिए तय हुई आयु सीमा
नई नीति के तहत यातायात थानों में तैनाती के लिए अधिकतम आयु सीमा निर्धारित की गई है।
पुलिस निरीक्षक : 50 वर्ष
सहायक अवर निरीक्षक एवं हवलदार : 55 वर्ष
पुलिस अवर निरीक्षक : 40 वर्ष
सिपाही एवं चालक सिपाही : 35 वर्ष
सरकार का उद्देश्य अपेक्षाकृत ऊर्जावान और प्रशिक्षित कर्मियों को यातायात प्रबंधन में शामिल करना है, ताकि सड़क पर बेहतर निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
तीन वर्षों का रिकॉर्ड होगा अहम
नई व्यवस्था में केवल वरिष्ठता ही नहीं, बल्कि कार्य प्रदर्शन को भी महत्व दिया गया है। यातायात थानों में तैनाती के लिए संबंधित कर्मी का सेवा रिकॉर्ड साफ-सुथरा होना जरूरी होगा। पिछले तीन वर्षों के वार्षिक गोपनीय चरित्र अभिलेख में प्रदर्शन संतोषजनक से कम नहीं होना चाहिए। इसके अलावा शारीरिक रूप से फिट, यातायात नियमों की अच्छी जानकारी रखने वाले तथा कंप्यूटर संचालन और टाइपिंग में दक्ष कर्मियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रशिक्षण प्राप्त कर्मियों को मिलेगा फायदा
यातायात प्रबंधन से जुड़े विशेष प्रशिक्षण प्राप्त पुलिसकर्मियों को चयन प्रक्रिया में अतिरिक्त महत्व दिया जाएगा। इससे तकनीक आधारित निगरानी और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम के संचालन में दक्ष कर्मियों की संख्या बढ़ेगी।
नई नीति में गृह जिले में नहीं होगी पोस्टिंग
नई नीति के तहत किसी भी कर्मी की तैनाती उसके गृह जिले में नहीं की जाएगी। इसका उद्देश्य कार्य में निष्पक्षता बनाए रखना और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। साथ ही यातायात पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कुल पदों में एक-तिहाई महिला कर्मियों की मौजूदगी सुनिश्चित करने का प्रावधान भी किया गया है।
पारदर्शी चयन के लिए बनेगी समिति
तैनाती प्रक्रिया की निगरानी के लिए तीन पुलिस उपाधीक्षकों की समिति गठित की जाएगी। समिति योग्य अभ्यर्थियों का चयन करेगी और रिक्त पदों के मुकाबले कम से कम 70 प्रतिशत पदों पर नियुक्ति सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा 15 प्रतिशत उम्मीदवारों की प्रतीक्षा सूची भी तैयार की जाएगी, जो एक वर्ष तक वैध रहेगी। इससे भविष्य में रिक्तियां उत्पन्न होने पर नियुक्ति प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जा सकेगा।

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