बाढ़ प्रबंधन और नदी सुरक्षा पर बड़ा निवेश
राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बाढ़ प्रबंधन कार्यों को प्राथमिकता देते हुए 400.66 करोड़ रुपये की राशि की स्वीकृति दी है। इसके अलावा भू-अर्जन मद में 250 करोड़ रुपये और सीमा क्षेत्रों में नदी प्रबंधन गतिविधियों के लिए 120 करोड़ रुपये खर्च करने की अनुमति दी गई है। बिहार हर वर्ष बाढ़ की चुनौती का सामना करता है। ऐसे में इन योजनाओं से तटबंधों की मजबूती, नदी प्रबंधन और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
मुंगेर में सिंचाई परियोजना को मिली नई ताकत
मुंगेर जिले के खरगपुर क्षेत्र में मनी नदी और सिंधवारणी नदी के संगम स्थल पर प्रस्तावित जल संसाधन परियोजना के लिए सरकार ने अतिरिक्त राशि मंजूर की है। पहले इस योजना की लागत 125 करोड़ रुपये निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर 196.89 करोड़ रुपये कर दिया गया है। योजना के तहत गेटेड बैराज का निर्माण और लगभग 9.66 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर का पुनर्स्थापन किया जाएगा। इसके पूरा होने पर करीब 671 हेक्टेयर कृषि भूमि को बेहतर सिंचाई सुविधा मिल सकेगी, जिससे किसानों को सीधा लाभ होगा।
हाजीपुर, बेगूसराय और सहरसा को बड़ी राहत
शहरी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। हाजीपुर में जलापूर्ति परियोजना के लिए 131.88 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। वहीं बेगूसराय में सीवरेज नेटवर्क और एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) निर्माण के लिए 375.86 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। इसके अलावा सहरसा जलापूर्ति योजना के लिए 127.45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से हजारों परिवारों को स्वच्छ पेयजल और बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
रोजगार और आजीविका को मिलेगा बढ़ावा
राज्य सरकार ने ‘विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ को भी मंजूरी प्रदान की है। यह योजना 1 जुलाई 2026 से लागू होगी। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और लोगों की आय में सुधार करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सासामुसा चीनी मिल के लिए राहत पैकेज
गोपालगंज जिले की बंद पड़ी सासामुसा चीनी मिल को दोबारा शुरू कराने की दिशा में भी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के लिए 42.99 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इस निर्णय से किसानों को लंबे समय से लंबित भुगतान मिलने का रास्ता साफ होगा। साथ ही चीनी मिल के दोबारा चालू होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

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