सरकार ने इसके लिए 'सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र परियोजना' को आगे बढ़ाया है, जिसके तहत पूरे प्रदेश को नौ क्षेत्रीय जोनों में विकसित किया जाएगा। इन जोनों में आधुनिक औद्योगिक और प्रशिक्षण ढांचे तैयार किए जाएंगे, ताकि युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर मिल सकें।
हर जोन में बनेगा हब और स्पोक मॉडल
इस परियोजना के तहत हर क्षेत्रीय जोन में एक मुख्य उत्कृष्टता केंद्र यानी ‘हब’ और उससे जुड़े कई ‘स्पोक’ यानी कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जाएंगे। हब में उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण, अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षक प्रशिक्षण, प्लेसमेंट सहायता और करियर काउंसलिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। वहीं, स्पोक केंद्रों के माध्यम से क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे स्थानीय उद्योगों के लिए उपयुक्त मानव संसाधन तैयार हो सके।
उद्योगों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरी तरह उद्योगों की मांग के अनुरूप तैयार किए जाएं, ताकि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवाओं को रोजगार के लिए भटकना न पड़े। उनका उद्देश्य है कि यह परियोजना केवल प्रशिक्षण केंद्र न बनकर रोजगार, उद्योग और उद्यमिता का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करे।
निवेश और औद्योगिक विकास को मिलेगी गति
राज्य सरकार का मानना है कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आई है। इसी को देखते हुए भविष्य की जरूरतों के अनुसार कुशल मानव संसाधन तैयार करने के लिए यह योजना बनाई गई है। इससे औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
एक ही परिसर में मिलेंगी कई सुविधाएं
इन हब केंद्रों में कौशल विकास संस्थानों के साथ-साथ औद्योगिक भूखंड, प्लग एंड प्ले यूनिट, साझा सुविधा केंद्र, रोजगार सहायता प्रणाली, डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम, विदेशी भाषा प्रशिक्षण और उद्यमिता विकास जैसी सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे युवाओं को न केवल प्रशिक्षण मिलेगा, बल्कि वे सीधे उद्योग और स्टार्टअप इकोसिस्टम से भी जुड़ सकेंगे।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मजबूत होगा मॉडल
इस परियोजना को और प्रभावी बनाने के लिए सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन और उसके सहयोगी संस्थानों के अनुभव का लाभ भी लिया जाएगा। ये संस्थान पाठ्यक्रम निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रशिक्षण पद्धति, नेतृत्व विकास और मूल्यांकन प्रणाली में सहयोग करेंगे।
भूमि उपलब्ध, पहले चरण की शुरुआत
अधिकारियों के अनुसार पहले चरण के लिए मऊ, कानपुर देहात, कन्नौज, रायबरेली, प्रतापगढ़ और कानपुर नगर में कुल 369 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है। अन्य जिलों में भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया जारी है।

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