बिहार में दाखिल-खारिज पर सरकार सख्त, जमीन मालिक रहें सतर्क

पटना। बिहार में जमीन से जुड़े मामलों को पारदर्शी और विवादमुक्त बनाने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट किया है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिल-खारिज कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अधिकारियों को लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने विभागीय समीक्षा के दौरान कहा कि कई जिलों से फर्जी निबंधन के आधार पर दाखिल-खारिज किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। ऐसे मामलों में लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को जमीन संबंधी मामलों की गहन जांच करने और अनियमितताओं पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

फर्जी दस्तावेजों पर बढ़ेगी निगरानी

सरकार का मानना है कि गलत दस्तावेजों और फर्जी निबंधन के आधार पर होने वाले दाखिल-खारिज से भूमि विवाद बढ़ते हैं। इसलिए अब ऐसे मामलों की विशेष निगरानी की जाएगी। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि हर आवेदन की पूरी जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए।

इन परिस्थितियों में खारिज होगा आवेदन

राजस्व अधिकारियों के अनुसार यदि खरीदी गई भूमि पर शांतिपूर्ण दखल-कब्जा नहीं है, जमीन किसी विवाद में फंसी हुई है या मामला न्यायालय में लंबित है, तो दाखिल-खारिज का आवेदन अस्वीकृत किया जा सकता है। इसके अलावा यदि दस्तावेजों में कोई त्रुटि पाई जाती है या स्वामित्व को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं होती है, तब भी आवेदन प्रभावित हो सकता है।

जमीन खरीदने से पहले करें पूरी जांच

अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी है कि जमीन खरीदने से पहले उसकी पूरी जानकारी प्राप्त करें। भूमि का स्वामित्व, राजस्व अभिलेख, संभावित विवाद और न्यायालय से जुड़े मामलों की जांच करना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती स्तर पर सावधानी बरतने से भविष्य में कानूनी विवाद और दाखिल-खारिज से जुड़ी परेशानियों से बचा जा सकता है।

भूमि सीमांकन पर भी दिया गया जोर

राजस्व विभाग ने जमीन मालिकों से अपनी भूमि का स्पष्ट सीमांकन कराने की अपील की है। चहारदीवारी, सीमा स्तंभ या अन्य वैध माध्यमों से भूमि की पहचान सुनिश्चित करने से भविष्य में होने वाले विवादों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

पारदर्शी व्यवस्था पर सरकार का फोकस

राज्य सरकार का कहना है कि भूमि संबंधी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी बनाया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य है कि लोगों को दाखिल-खारिज और अन्य राजस्व सेवाओं के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और सभी मामलों का समयबद्ध निपटारा हो सके।

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