कब माना जाता है पीरियड्स पूरी तरह बंद होना?
जब किसी महिला को लगातार 12 महीनों तक मासिक धर्म नहीं आता और इसका कोई दूसरा चिकित्सकीय कारण नहीं होता, तब इसे मेनोपॉज माना जाता है। भारत समेत कई देशों में महिलाओं में मेनोपॉज की औसत उम्र लगभग 50 वर्ष के आसपास मानी जाती है। मेनोपॉज अचानक नहीं आता। इससे पहले कई वर्षों तक शरीर में बदलाव की प्रक्रिया चल सकती है, जिसे पेरिमेनोपॉज कहा जाता है।
40 की उम्र के बाद शुरू हो सकते हैं बदलाव
कई महिलाओं में 40 की उम्र के बाद पीरियड्स के पैटर्न में बदलाव दिखाई देने लगता है। कभी पीरियड्स समय से पहले आ सकते हैं तो कभी कई सप्ताह या महीनों का अंतर हो सकता है। रक्तस्राव सामान्य से कम या अधिक भी हो सकता है। इस दौरान हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव के कारण मूड में बदलाव, नींद की परेशानी या गर्मी लगने जैसी समस्याएं भी कुछ महिलाओं में दिखाई दे सकती हैं।
मेनोपॉज के आम संकेत क्या होते हैं?
पीरियड्स अनियमित होने के अलावा मेनोपॉज के आसपास कई अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। इनमें अचानक गर्मी लगना यानी हॉट फ्लैश, रात में पसीना आना, नींद में परेशानी, मूड में बदलाव और थकान शामिल हो सकते हैं। हालांकि, हर महिला में सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है।
पीरियड्स बंद होने के बाद क्या होता है?
मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। इसका असर हड्डियों और हृदय स्वास्थ्य समेत शरीर के कई हिस्सों पर पड़ सकता है। उम्र बढ़ने के साथ ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों के कमजोर होने का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसलिए इस उम्र में संतुलित आहार, पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी, नियमित शारीरिक गतिविधि और डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
मेनोपॉज के आसपास पीरियड्स में बदलाव सामान्य हो सकता है, लेकिन हर तरह का रक्तस्राव सामान्य नहीं माना जाता। यदि 12 महीने तक पीरियड्स बंद रहने के बाद दोबारा रक्तस्राव हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।

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