1 .28 लाख से ज्यादा महिलाएं बनीं 'लखपति दीदी'
प्रदेश में 10.50 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से करीब सवा करोड़ ग्रामीण परिवार जुड़े हैं। इनमें 28.16 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। पशुपालन, दूध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय उत्पादों जैसे कामों से महिलाएं कमाई के नए रास्ते बना रही हैं।
2 .छोटी बचत से उद्यमिता तक पहुंच
महिलाओं को पहले समूहों से जोड़कर बचत और वित्तीय प्रबंधन की जानकारी दी जाती है। इसके बाद उन्हें ऋण, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने की कोशिश की जाती है। इससे बिना बड़ी पूंजी के भी ग्रामीण महिलाएं अपना काम शुरू कर पा रही हैं।
3 .मजबूत हुआ महिलाओं का नेटवर्क
महिला समूहों को मजबूती देने के लिए प्रदेश में 65,544 ग्राम संगठन और 3,298 संकुल स्तरीय संघ बनाए गए हैं। ये संगठन समूहों को वित्तीय अनुशासन, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ने में मदद करते हैं।
4 .परिवार से लेकर गांव की अर्थव्यवस्था तक असर
महिलाओं की बढ़ती आय का फायदा सिर्फ उनके परिवार तक नहीं रुक रहा है। इससे बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों पर खर्च बढ़ने के साथ गांवों में स्थानीय बाजार और रोजगार को भी बढ़ावा मिल रहा है। इस तरह महिला आत्मनिर्भरता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दे रही है।

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