भारत-रूस का बड़ा कदम, डॉलर हुआ कमजोर, अमेरिका के उड़े होश!

नई दिल्ली। अमेरिका की पाबंदियों और व्यापारिक दबाव के बीच भारत और रूस के आर्थिक रिश्तों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दोनों देशों के बीच कारोबार में अब डॉलर पर निर्भरता लगातार घट रही है। रूस के एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी के मुताबिक, भारत-रूस व्यापार में करीब 96 फीसदी भुगतान रुपये और रूबल में किया जा रहा है।

90 फीसदी लेनदेन 10 मिनट में

रूस के प्रमुख बैंक स्बेरबैंक की भारतीय इकाई के प्रमुख इवान नोसोव के अनुसार, दोनों देशों के बीच भुगतान व्यवस्था अब काफी मजबूत हो चुकी है। करीब 90 फीसदी ट्रांजैक्शन 10 मिनट के भीतर पूरे हो जाते हैं, जबकि आधे से अधिक भुगतान एक मिनट से भी कम समय में प्रोसेस हो जाते हैं। इस व्यवस्था में 22 रूसी और 17 भारतीय बैंक जुड़े हुए हैं।

यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ा कारोबार

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत और रूस के बीच व्यापार में तेजी आई। 2024 में दोनों देशों का कारोबार करीब 70 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। भारत ने इस दौरान रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदा। पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल अपेक्षाकृत आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध हुआ, जिससे भारतीय खरीदारों को फायदा मिला।

रुपये के जमा होने की समस्या भी संभली

स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़ाने के दौरान दोनों देशों के सामने रुपये के ज्यादा जमा होने की चुनौती आई थी। भारत रूस से ज्यादा आयात कर रहा था, जबकि रूस को भारत से उतना निर्यात नहीं हो रहा था। इससे रूसी कारोबारियों के पास रुपये जमा होने लगे। अब बैंकिंग नेटवर्क और भुगतान व्यवस्था में सुधार के जरिए इस समस्या को काफी हद तक संभालने की कोशिश की गई है।

भारत और रूस के बीच स्थानीय मुद्राओं में बढ़ता कारोबार वैश्विक भुगतान व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत माना जा रहा है। इससे दोनों देशों को डॉलर आधारित भुगतान तंत्र पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

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