मुजफ्फरपुर जिले में अब तक कुढ़नी, गायघाट और मुशहरी प्रखंड के दो दर्जन से ज्यादा शिक्षकों को नोटिस जारी किए गए हैं। संबंधित शिक्षकों से सात दिनों के भीतर अपना पक्ष और उससे जुड़े प्रमाण देने को कहा गया है।
आरक्षित पद पर चयन को लेकर उठे सवाल
विभाग की जांच में ऐसे मामले सामने आने की बात कही गई है, जिनमें बिहार से बाहर के पते वाले अभ्यर्थियों का चयन आरक्षित श्रेणी के पदों पर हुआ। इनमें सामान्य महिला कोटे के अलावा जाति आधारित आरक्षण और दिव्यांग श्रेणी से जुड़े मामले भी बताए जा रहे हैं।
सभी प्रखंडों से मांगा गया रिकॉर्ड
मामले को लेकर जिले के सभी प्रखंडों और नगर क्षेत्र के विद्यालयों से TRE के तीनों चरणों में नियुक्त शिक्षकों की जानकारी जुटाई जा रही है। स्कूल प्रधानाध्यापकों से दूसरे राज्यों के निवासियों के नाम, पता और संबंधित राज्य समेत अन्य विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया है। अभी तीन प्रखंडों से मिली जानकारी के आधार पर संबंधित शिक्षकों को नोटिस भेजे गए हैं। दूसरे क्षेत्रों से रिकॉर्ड आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो कार्रवाई
विभाग ने साफ किया है कि शिक्षकों का जवाब केवल औपचारिक नहीं, बल्कि दस्तावेजों और प्रमाणों पर आधारित होना चाहिए। अगर जांच में आरक्षण का गलत लाभ लेने की पुष्टि होती है या जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें सेवा समाप्ति भी शामिल हो सकती है।
BPSC से भी मांगा जाएगा इसका स्पष्टीकरण
पूरे मामले में शिक्षा विभाग बीपीएससी और शिक्षा निदेशालय से भी मार्गदर्शन लेने की तैयारी में है। खास तौर पर यह स्पष्ट किया जाएगा कि संबंधित अभ्यर्थियों का रिजल्ट आरक्षित श्रेणी में किस आधार पर जारी हुआ और नियुक्ति के दौरान कौन से नियम लागू किए गए थे। इन संस्थाओं से मिलने वाले दिशा-निर्देश और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही शिक्षकों के खिलाफ अंतिम कार्रवाई तय की जाएगी।
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