सर्वे के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि कितनी नजूल संपत्तियों पर अवैध कब्जा है, कितनी जमीन फ्रीहोल्ड हो चुकी है और कितने मामले अदालतों में लंबित हैं। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को पूरी जानकारी जुटाकर रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इसके बाद प्रवर समिति की अगली बैठक में रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी।
करीब दो लाख करोड़ की संपत्ति का अनुमान
प्रदेश में लगभग 75 हजार एकड़ नजूल भूमि होने का अनुमान है, जिसकी कीमत करीब दो लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, वाराणसी समेत कई बड़े शहरों में नजूल संपत्तियां मौजूद हैं। प्रयागराज के सिविल लाइंस क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में ऐसी जमीनें बताई जाती हैं।
अवैध कब्जों पर भी होगी नजर
सरकार का फोकस नजूल जमीनों के अवैध इस्तेमाल और फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जे पर है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सर्वे के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो। साथ ही नजूल संपत्तियों से जुड़े लंबित मुकदमों और पुराने रिकॉर्ड का भी पूरा ब्योरा तैयार किया जाएगा।
कानून में संशोधन की तैयारी
नजूल संपत्ति विधेयक-2024 पहले विधानसभा से पारित हो चुका है, लेकिन विधान परिषद में इसे प्रवर समिति के पास भेज दिया गया था। समिति में मिले सुझावों और नए सर्वे के आधार पर विधेयक में संशोधन किया जा सकता है। संशोधित प्रस्ताव को आगामी शीतकालीन सत्र में विधान परिषद के सामने रखने की संभावना है।
सरकार का उद्देश्य नजूल भूमि को निजी हितों के बजाय विकास और सार्वजनिक उपयोग में लाना बताया जा रहा है। वहीं, विपक्ष इस कानून को लेकर सरकार पर सवाल उठाता रहा है। ऐसे में नए सर्वे और प्रस्तावित संशोधन के बाद नजूल संपत्तियों को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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