रूस-भारत की नई रणनीति, अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती!

नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती नज़दीकी एक बार फिर सुर्खियों में है। जब दुनिया अभी तक रूस से सस्ते तेल के आयात पर चल रही बहस से उभर भी नहीं पाई थी, उसी बीच रूस ने भारत को एक और बड़ा ऑफर दिया है, LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की सप्लाई बढ़ाने का। यह कदम न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती भी बन सकता है।

रूस का नया प्रस्ताव

रूस के ऊर्जा मंत्री सर्गेई त्सिविलेव ने कहा है कि मॉस्को भारत को अपने मौजूदा और आने वाले प्रोजेक्ट्स से LNG सप्लाई बढ़ाने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि भारत की ऊर्जा खपत लगातार बढ़ रही है और रूस इस दिशा में एक दीर्घकालिक भागीदार बनना चाहता है। भारत ने अपने ऊर्जा मिश्रण में गैस की हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में रूस की यह पेशकश भारत के लिए किफायती और स्थिर विकल्प साबित हो सकती है।

LNG सप्लाई में बढ़ोतरी

रूस वर्तमान में भारत को सालाना करीब 30 लाख टन LNG सप्लाई करता है। रूसी उप-प्रधानमंत्री एलेक्ज़ेंडर नोवाक ने जुलाई में संकेत दिया था कि दोनों देश गैस क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाने के नए रास्ते तलाश रहे हैं। रूस का लक्ष्य आने वाले वर्षों में भारत को कोयले के निर्यात को 4 करोड़ टन तक ले जाने का भी है।

अमेरिका की चिंता क्यों बढ़ी?

यह घोषणा उस समय आई है जब अमेरिका ने रूस की दो प्रमुख ऊर्जा कंपनियों रोसनेफ्ट (Rosneft) और लुकोइल (Lukoil) पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन प्रतिबंधों से भारत के लिए रूस से तेल आयात करना पहले से अधिक जटिल हो गया है। इसके बावजूद, भारत ने रूस के साथ अपने ऊर्जा संबंधों को बनाए रखा है।

भारत के लिए क्या फायदे होंगे

दरअसल रूस से मिलने वाली गैस और तेल वैश्विक दरों की तुलना में किफायती है। विविध स्रोतों से आयात भारत को वैश्विक राजनीतिक तनावों से बचाने में मदद करेगा। वहीं, दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग बढ़ने से व्यापारिक और राजनीतिक संबंध भी मजबूत होंगे।

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