मक्का बन रही किसानों की नई नकदी फसल
अब तक प्रदेश में गन्ना, तंबाकू और सब्जियों को प्रमुख नकदी फसल माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मक्का की खेती तेजी से बढ़ी है। खासतौर पर ग्रीष्मकालीन हाइब्रिड मक्का की अच्छी पैदावार ने किसानों का रुझान इस ओर बढ़ाया है। कम लागत और बेहतर उत्पादन के कारण अब मक्का किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बनती जा रही है।
किसानों को मिलेगा लाभकारी मूल्य
सरकार इस बार किसानों को मक्का का लाभकारी मूल्य दिलाने पर जोर दे रही है। सरकारी खरीद के तहत किसानों को 2410 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य मिलने की संभावना है। इससे बाजार में कम दाम मिलने की समस्या से राहत मिलेगी।
20 हजार से अधिक किसानों को लाभ
प्रदेश में मक्का की खेती लगातार बढ़ रही है। केवल गोंडा जिले में ही करीब 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का की खेती की जा रही है। इसकी पैदावार 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच रही है, जिससे किसानों की आमदनी में भी इजाफा हुआ है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में 20 हजार से अधिक किसान मक्का उत्पादन से जुड़े हुए हैं और सरकारी खरीद शुरू होने से उन्हें सीधा फायदा मिलेगा।
इन जिलों में होगी मक्का की सरकारी खरीद
सरकार ने जिन 25 जिलों में मक्का खरीद का फैसला लिया है उनमें गोंडा, बहराइच, आगरा, अलीगढ़, मैनपुरी, फिरोजाबाद, एटा, कासगंज, हाथरस, बदायूं, शाहजहांपुर, रामपुर, संभल, बुलंदशहर, हापुड़, कानपुर नगर, औरैया, इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, उन्नाव, हरदोई, बलिया, फतेहपुर और मिर्जापुर शामिल हैं।
खाद्य एवं विपणन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, खरीद लक्ष्य और क्रय केंद्रों की सूची जल्द जारी की जाएगी। सरकार की कोशिश है कि किसानों को उनकी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो और उन्हें समय पर भुगतान मिल सके।

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