ग्रामीणों को मिला कानूनी स्वामित्व का प्रमाण
स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी भूमि में बसे परिवारों को उनके मकान और जमीन का वैध दस्तावेज प्रदान किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में हजारों गांवों में सर्वे पूरा कर डिजिटाइज्ड रिकॉर्ड तैयार किए जा चुके हैं। इससे ग्रामीणों को पहली बार अपने घर और संपत्ति पर स्पष्ट कानूनी अधिकार प्राप्त हुआ है। यह दस्तावेज अब सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, बैंक से ऋण प्राप्त करने और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभा रहा है।
घरौनी से बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर
घरौनी केवल एक कागज नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा की चाबी बनकर उभरी है। इसके माध्यम से अब गांवों के लोग औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ पा रहे हैं। छोटे कारोबार, स्वरोजगार और कृषि से जुड़े कार्यों के लिए ऋण लेना आसान हुआ है। इससे न सिर्फ आय के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिल रही है।
इस नई व्यवस्था से भूमि विवादों पर लगी लगाम
स्पष्ट और डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से गांवों में जमीन और मकान से जुड़े विवादों में तेजी से कमी देखी जा रही है। फर्जी दावों और अवैध कब्जों पर प्रभावी नियंत्रण लगा है। इससे ग्रामीण स्तर पर आपसी तनाव घटा है और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक मजबूत हुई है। आने वाले समय में न्यायालयों में लंबित मामलों में भी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
उत्तर प्रदेश में लगातार जारी है वितरण का कार्य
प्रदेश सरकार घरौनी वितरण की प्रक्रिया को लगातार आगे बढ़ा रही है। हाल के महीनों में लाखों नई घरौनियां तैयार की गई हैं और चरणबद्ध तरीके से पात्र परिवारों तक पहुंचाई जा रही हैं। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि कोई भी योग्य ग्रामीण परिवार संपत्ति अधिकार से वंचित न रह जाए।
ड्रोन तकनीक से सर्वे में आई है पारदर्शिता
स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। इससे गांवों का सर्वे तेज, सटीक और पारदर्शी बन पाया है। आधुनिक तकनीक से तैयार डिजिटल नक्शे और रिकॉर्ड भविष्य में ग्रामीण भूमि प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाएंगे। यह पहल योगी सरकार की डिजिटल गवर्नेंस नीति को भी मजबूती देती है।

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