ऑल टाइम हाई पर विदेशी मुद्रा भंडार
भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 23 जनवरी को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 8 अरब डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी के साथ 709 अरब डॉलर के पार पहुंच गया। यह भारत के इतिहास का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले सितंबर 2024 में भंडार ने उच्चतम स्तर छुआ था, लेकिन बाद में रुपये को स्थिर रखने के लिए इसमें गिरावट देखने को मिली थी।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में मजबूती
विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA) होती हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस श्रेणी में भी बढ़त दर्ज की गई है। डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य प्रमुख मुद्राओं में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत की परिसंपत्तियों का मूल्य मजबूत बना हुआ है। यह दर्शाता है कि भारत का रिजर्व पोर्टफोलियो संतुलित और विविध है।
सोने ने बढ़ाई रिजर्व की चमक
इस दौरान गोल्ड रिजर्व में भी उल्लेखनीय उछाल देखा गया। वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में मजबूती का सीधा असर भारत के भंडार पर पड़ा, जिससे गोल्ड होल्डिंग का मूल्य तेजी से बढ़ा। सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है और इसके बढ़ते मूल्य ने भारत के रिजर्व को और मजबूत बनाया है।
SDR और IMF में भी बढ़त
आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि विशेष आहरण अधिकार (SDR) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की आरक्षित स्थिति में भी इजाफा हुआ है। यह भारत की वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में मजबूत भागीदारी और भरोसे को दर्शाता है।
क्यों अहम है यह उपलब्धि?
विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड स्तर पर होना भारत को कई मोर्चों पर मजबूती देता है। इससे आयात भुगतान, विदेशी कर्ज दायित्व और मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने की क्षमता बढ़ती है। साथ ही, यह अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को यह भरोसा देता है कि भारत किसी भी वैश्विक आर्थिक झटके का सामना करने में सक्षम है।

0 comments:
Post a Comment