मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार 50 करोड़ से 150 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं की स्वीकृति वित्त मंत्री करेंगे, जबकि इससे अधिक लागत वाली परियोजनाओं को अंतिम मंजूरी मुख्यमंत्री स्तर से ही मिलेगी।
फैसले से तेज होगी विकास योजनाओं की रफ्तार
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से फाइलों की अनावश्यक देरी खत्म होगी और विकास कार्यों को समय पर हरी झंडी मिल सकेगी। खासकर सड़क निर्माण, भवन निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं को इससे गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि लोक निर्माण विभाग की सड़कों की तरह अब शासकीय भवनों के निर्माण में भी पांच साल की अनुरक्षण (मेंटेनेंस) गारंटी अनिवार्य होगी। इससे निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने और लंबे समय तक सुरक्षित संरचनाएं सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
तय समय पर स्वीकृत होंगी कार्ययोजनाएं
बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि अपनी वार्षिक कार्ययोजना हर हाल में 15 अप्रैल तक स्वीकृत करा लें। यदि किसी परियोजना की लागत में 15 प्रतिशत से अधिक वृद्धि होती है, तो संबंधित विभाग को कारण स्पष्ट करते हुए दोबारा अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा।
वित्तीय सुधारों पर सरकार का फोकस
बैठक में नीति आयोग और आरबीआई की रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया गया कि उत्तर प्रदेश की वित्तीय स्थिति में लगातार सुधार के संकेत मिल रहे हैं। कोषागार, बजट प्रबंधन और पेंशन प्रणाली में डिजिटल सुधारों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट और नई वर्गीकरण प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया।

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