अमेरिका-चीन को पीछे छोड़ भारत ग्रोथ लीडर: विश्व बैंक

न्यूज डेस्क। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में भारत ने अपनी मजबूत विकास क्षमता से पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने भारतीय अर्थव्यवस्था की खुलकर सराहना करते हुए कहा है कि विकास दर के मामले में भारत न केवल उम्मीदों पर खरा उतरा है, बल्कि अमेरिका और चीन जैसे बड़े देशों को भी पीछे छोड़ चुका है। उनके अनुसार, करीब 7.5 प्रतिशत की विकास दर भारत की आर्थिक मजबूती और सही दिशा में किए गए सुधारों का प्रमाण है।

उम्मीद से बेहतर वैश्विक प्रदर्शन

अजय बंगा के मुताबिक बीते एक-डेढ़ साल में वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन अनुमान से बेहतर रहा है। अमेरिका की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत रही, जबकि चीन और भारत ने शुरुआती अनुमानों से ज्यादा तेज रफ्तार पकड़ी। हालांकि इन तीनों में भारत की विकास दर सबसे ऊंची रही, जिसने उसे वैश्विक ग्रोथ लीडर के रूप में स्थापित किया है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और सुधार बने ताकत

भारत की तेज आर्थिक रफ्तार के पीछे बुनियादी ढांचे में हुआ बड़ा निवेश और नीतिगत सुधारों की अहम भूमिका मानी जा रही है। खासतौर पर लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षेत्र में हुए बदलावों की तारीफ करते हुए बंगा ने कहा कि अभी भले ही और सुधारों की जरूरत हो, लेकिन जो प्रगति हुई है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका मानना है कि अगर लॉजिस्टिक्स लागत को जीडीपी के 14 प्रतिशत से घटाकर एकल अंक में लाया जाए, तो भारत वैश्विक बाजार में और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकता है।

GST को बताया ऐतिहासिक सुधार

अजय बंगा ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) को भारत की आर्थिक यात्रा का एक निर्णायक मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि यह सुधार देश की अर्थव्यवस्था को एकीकृत करने में अहम साबित हुआ है। इस अवसर पर उन्होंने दिवंगत वित्त मंत्री अरुण जेटली की भूमिका को याद करते हुए कहा कि राजनीतिक सहमति और मजबूत नेतृत्व के बिना इतना बड़ा सुधार संभव नहीं था।

युवा आबादी भारत की सबसे बड़ी पूंजी

विश्व बैंक प्रमुख ने भारत की युवा आबादी को उसकी सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभा और श्रमशक्ति की कोई कमी नहीं है, लेकिन इस क्षमता को उत्पादक कार्यबल में बदलने के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य पर समान रूप से निवेश जरूरी है। उनके अनुसार, मानव पूंजी में निवेश के बिना लंबे समय तक तेज विकास दर बनाए रखना कठिन हो सकता है।

कारोबार को आसान बनाने की जरूरत

व्यापारिक माहौल को और बेहतर बनाने के लिए बंगा ने भूमि और श्रम सुधारों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर कारोबार शुरू करने के लिए जरूरत से ज्यादा अनुमतियों की बाधा कम की जाए, तो निवेश और रोजगार दोनों में तेजी आएगी। उनका मानना है कि छोटे लेकिन लगातार किए गए सुधार ही लंबे समय में बड़े आर्थिक लक्ष्य हासिल करने में मदद करते हैं।

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