विकास प्राधिकरण और जिला पंचायत के विवाद का अंत
प्रदेश के कई छोटे शहरों में यह विवाद हमेशा से बना हुआ था कि नगरीय निकाय सीमा से बाहर के विकास क्षेत्र में निर्माण के लिए मानचित्र पास कराने की जिम्मेदारी किसकी है। विकास प्राधिकरण इसे अपनी मंजूरी के बिना अवैध मानता है, जबकि जिला पंचायत स्थानीय स्तर पर कई मानचित्र पास कर देती है। इससे अक्सर निर्माण के ध्वस्तीकरण या कानूनी विवाद खड़े हो जाते थे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों विभागों से प्रस्तुतीकरण लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए हैं। अब भविष्य में ऐसे विवादों की संभावना बेहद कम हो जाएगी और निर्माण गतिविधियाँ नियमानुसार होंगी। यदि आवश्यक हुआ तो कानून में संशोधन करके इस प्रक्रिया को और भी पारदर्शी बनाया जाएगा।
मास्टर प्लान का महत्व
मुख्यमंत्री ने सभी नगरीय निकायों के मास्टर प्लान तैयार करने का भी निर्देश दिया है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 17 नगर निगम सहित कुल 762 नगरीय निकाय हैं, जिनमें से केवल लगभग 200 के पास ही मास्टर प्लान हैं। मास्टर प्लान न केवल शहरों की व्यवस्थित योजना को सुनिश्चित करता है, बल्कि नए निर्माण, सड़क नेटवर्क, पार्किंग, जल निकासी और अन्य बुनियादी ढांचे के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश भी प्रदान करता है।
इसके तहत यह भी निर्णय लिया गया कि मौजूदा निर्माणों को यदि नियमानुसार और बाइलाज के तहत किया गया है, तो उन्हें बनाए रखा जाएगा। इसका मतलब यह है कि आम नागरिकों को अचानक नुकसान या बाधा नहीं होगी।
छोटे शहरों के लिए लाभ
स्थानीय स्तर पर निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
छोटे शहरों में व्यवस्थित और नियंत्रित विकास सुनिश्चित होगा।
निर्माण और विकास के लिए स्पष्ट प्रक्रियाएं तय होंगी, जिससे कानूनी विवाद खत्म होंगे।
नगरीय विकास योजनाओं के तहत सुविधाएं और बुनियादी ढांचा समय पर और व्यवस्थित रूप से उपलब्ध होंगे।
.png)
0 comments:
Post a Comment