राजधानी में प्रवेश करते ही दिखेगी यूपी की पहचान
मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट किया है कि लखनऊ में प्रवेश करते ही उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत झलकनी चाहिए। हाल ही में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रवेशद्वार केवल संरचनाएं न हों, बल्कि वे राज्य की पहचान और गौरव के प्रतीक बनें।
हर मार्ग पर दिखेगा अलग सांस्कृतिक स्वरूप
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, लखनऊ से प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की ओर जाने वाले मार्गों पर उस स्थान की विरासत को दर्शाने वाले प्रवेशद्वार बनाए जाएंगे।
प्रयागराज मार्ग (रायबरेली रोड) पर त्रिवेणी संगम और महाकुंभ की परंपरा को दर्शाने वाला ‘संगम द्वार’
अयोध्या मार्ग (बाराबंकी रोड) पर भगवान श्रीराम और सूर्यवंश की परंपरा पर आधारित ‘सूर्य द्वार’
मथुरा मार्ग (आगरा रोड) पर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को दर्शाने वाला ‘कृष्ण द्वार’
वाराणसी मार्ग (सुल्तानपुर रोड) पर श्री काशी विश्वनाथ धाम की झलक लिए ‘नंदी द्वार’
हस्तिनापुर मार्ग (हरदोई रोड) पर धर्म और न्याय का संदेश देता ‘धर्म द्वार’
नैमिषारण्य मार्ग (सीतापुर रोड) पर ऋषि परंपरा का प्रतीक ‘व्यास द्वार’
झांसी मार्ग (उन्नाव रोड) पर वीरता और शौर्य का प्रतीक ‘शौर्य द्वार’
सभी प्रवेशद्वारों पर उत्तर प्रदेश का राजकीय चिन्ह अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।
पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक सौंदर्य का संगम
मुख्यमंत्री योगी ने निर्देश दिए हैं कि प्रवेशद्वारों के डिजाइन में भारतीय पारंपरिक वास्तुकला, शिल्पकला और सांस्कृतिक प्रतीकों का प्रभावी समावेश हो। पत्थर की नक्काशी, स्तंभ, भित्ति चित्र, फव्वारे, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था और हरित परिदृश्य के जरिए इन द्वारों को सौंदर्यपूर्ण और अर्थपूर्ण बनाया जाएगा, ताकि यात्रियों को लखनऊ में कदम रखते ही सांस्कृतिक अनुभूति हो।
CSR फंड से होगा निर्माण, समन्वय पर जोर
इन प्रवेशद्वारों के निर्माण के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) फंड के उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि निर्माण कार्य तय मानकों के अनुरूप हो और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण समेत सभी संबंधित एजेंसियों से आवश्यक अनुमतियां लेकर समन्वय के साथ काम किया जाए।

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