वैश्विक व्यापार में भारत की नई दिशा
सरकार ने अपने व्यापारिक दृष्टिकोण को मजबूत बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर ध्यान केंद्रित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय निर्यात बढ़ाना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और घरेलू उद्योगों को वैश्विक बाजार के साथ जोड़ना है। इसके लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA/ECTA) को प्राथमिकता दी जा रही है।
पिछले पांच सालों की उपलब्धियां
अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत ने पिछले पांच वर्षों में कुल 8 महत्वपूर्ण व्यापार समझौतों को पूरा किया है। इनमें प्रमुख हैं:
भारत-मॉरीशस CECPA (2021)
भारत-ऑस्ट्रेलिया ECTA (2022)
भारत-यूएई CEPA (2022)
भारत-EFTA TEPA (2024)
इसके अलावा भारत-यूके CETA और भारत-ओमान CEPA अंतिम चरण में हैं। वहीं भारत-न्यूजीलैंड FTA और भारत-यूरोपीय संघ FTA की वार्ताएं भी पूरी हो चुकी हैं।
नए समझौते और बातचीत
वर्तमान में भारत कई देशों के साथ नए व्यापारिक समझौते पर चर्चा कर रहा है। इनमें शामिल हैं:
भारत-पेरू FTA
भारत-चिली CEPA
भारत-श्रीलंका ETCA
भारत-ऑस्ट्रेलिया CECA
भारत-कोरिया CEPA अपग्रेड
भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता
साथ ही, आसियान-भारत (AITIGA) समझौते की समीक्षा भी जारी है।
निवेश और व्यापार को फायदा
इन समझौतों के लागू होने से भारतीय MSME, किसान और निर्यातक सीधे लाभान्वित होंगे। टैरिफ कटौती से भारतीय उत्पाद विदेशों में सस्ते होंगे और विदेशी कंपनियों के लिए भारत में निवेश आसान बन जाएगा। इसके साथ ही रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी।
भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनाएगी। देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मजबूत होगी और भारत विश्वभर में भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार के रूप में उभरेगा।

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