अब तक लाखों परिवारों को मिला सहारा
इस योजना के तहत अब तक एक लाख से अधिक किसानों और उनके परिजनों को आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, योजना की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 1,08,000 से ज्यादा लाभार्थियों को इसका फायदा मिला है। इससे यह साफ होता है कि योजना न सिर्फ कागजों तक सीमित है, बल्कि ज़मीनी स्तर पर किसानों के जीवन को प्रभावित कर रही है।
दुर्घटना में 5 लाख रुपये तक की मदद
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत यदि किसी किसान की दुर्घटनावश मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो उसे या उसके आश्रितों को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। इस सहायता का उद्देश्य कठिन समय में परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाए रखना है। सरकार ने वर्ष 2023–24 से इस योजना का दायरा और बढ़ाते हुए भूमिहीन किसानों और खेतिहर मजदूरों को भी इसमें शामिल कर लिया है, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को सामाजिक सुरक्षा मिल सकी है।
डिजिटलीकरण से होगी प्रक्रिया आसान
योजना को और प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर इसका पूर्ण डिजिटलीकरण किया जा रहा है। राजस्व परिषद और एनआईसी के सहयोग से एक आधुनिक वेब पोर्टल और सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है, जिसके फरवरी 2026 तक पूरी तरह तैयार होने की उम्मीद है। डिजिटलीकरण के बाद किसान घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन से लेकर पात्रता जांच और डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खाते में राशि ट्रांसफर करने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि तहसील और जिला कार्यालयों के चक्कर लगाने की परेशानी भी खत्म होगी।
जवाबदेही और निगरानी पर भी जोर
योजना की निगरानी को मजबूत करने के लिए इसे डैशबोर्ड सिस्टम से जोड़ा जा रहा है, जिससे हर स्तर पर प्रगति की समीक्षा की जा सकेगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लाभ समय पर सही व्यक्ति तक पहुंचेगा। यह योजना न केवल किसान-हितैषी नीतियों को दर्शाती है, बल्कि राज्य सरकार के उस प्रयास को भी मजबूत करती है, जिसके तहत किसानों को सुरक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
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