भारत अब इस देश से करेगा 'FTA', ट्रंप को फिर लगेगी मिर्ची!

नई दिल्ली। भारत ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार मोर्चे पर एक और रणनीतिक दांव चल दिया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के ताजा बयान से यह साफ हो गया है कि भारत और चिली के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब अंतिम चरण में है। यह समझौता केवल आयात-निर्यात तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत की भविष्य की औद्योगिक और ग्रीन एनर्जी जरूरतों से सीधे जुड़ा माना जा रहा है।

पीयूष गोयल का साफ संदेश

ग्रेटर नोएडा में आयोजित ICAI के एक कार्यक्रम में पीयूष गोयल ने संकेत दिया कि भारत अब तेजी से विकसित और संसाधन-समृद्ध देशों के साथ व्यापारिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि चिली के साथ प्रस्तावित FTA भारत के लिए बेहद अहम है, क्योंकि इससे महत्वपूर्ण खनिजों की स्थायी आपूर्ति का रास्ता खुलेगा।

क्यों खास है चिली?

चिली दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां लिथियम, तांबा, कोबाल्ट, मोलिब्डेनम और रेनियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का विशाल भंडार मौजूद है। ये खनिज आज की अर्थव्यवस्था के सबसे संवेदनशील सेक्टर इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, बैटरी निर्माण, सोलर एनर्जी और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स की रीढ़ माने जाते हैं। भारत जिस तरह से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है, उसमें इन खनिजों की उपलब्धता रणनीतिक सुरक्षा का सवाल बन चुकी है।

PTA से CEPA तक का सफर

भारत और चिली के बीच व्यापारिक संबंध नए नहीं हैं। वर्ष 2006 से दोनों देशों के बीच प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) लागू है। अब इसे अपग्रेड कर कंप्रीहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) में बदला जा रहा है। नई डील में सिर्फ वस्तुओं का व्यापार ही नहीं, बल्कि डिजिटल सेवाएं, निवेश, MSME सहयोग, सप्लाई चेन और महत्वपूर्ण खनिज जैसे उभरते सेक्टर भी शामिल किए जाएंगे।

आंकड़े बता रहे हैं असली कहानी

व्यापार आंकड़े भारत की बदलती जरूरतों को साफ दिखाते हैं। वर्ष 2024-25 में जहां भारत का चिली को निर्यात मामूली गिरावट के साथ लगभग 1.15 अरब डॉलर रहा, वहीं चिली से आयात में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। आयात करीब 72 प्रतिशत बढ़कर 2.60 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह साफ संकेत है कि भारत की खनिज और कच्चे माल पर निर्भरता तेजी से बढ़ रही है।

ट्रंप की टैरिफ नीति के उलट भारत की राह

जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ बढ़ाकर वैश्विक व्यापार को संकुचित करने की नीति अपना रहे हैं, तब भारत बिल्कुल उलटी दिशा में चल रहा है। भारत पिछले कुछ वर्षों में मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, UAE, न्यूजीलैंड, ओमान, EFTA देशों, ब्रिटेन और हाल ही में यूरोपीय यूनियन के साथ व्यापार समझौते कर चुका है।

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