यह जन सुनवाई बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तत्वावधान में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता एडीएम (विधि-व्यवस्था) राकेश रंजन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्राधिकारी शंभुनाथ झा ने की। सुनवाई के दौरान विभिन्न पंचायतों के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने हाथ उठाकर परियोजना के समर्थन में अपनी सहमति दी, जिससे साफ संकेत मिला कि स्थानीय समाज इस परियोजना को लेकर सकारात्मक है।
विकास और रोजगार की नई उम्मीद
जन सुनवाई में मौजूद ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि पावर प्लांट की स्थापना से क्षेत्र का समग्र विकास होगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस परियोजना से न केवल बुनियादी ढांचे में सुधार होगा, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। वक्ताओं ने कहा कि पावर प्लांट के शुरू होने के बाद पीरपैंती एक तरह से “रोजगार का पावर हाउस” बन जाएगा, जिससे युवाओं को काम की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करना पड़ेगा।
औद्योगिक विकास यात्रा को रफ्तार
वक्ताओं ने यह भी कहा कि यह परियोजना सिर्फ पीरपैंती या भागलपुर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे बिहार की औद्योगिक और आर्थिक विकास यात्रा को गति देगी। बड़े स्तर पर बिजली उत्पादन होने से राज्य में उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और निवेश का माहौल और बेहतर होगा।
पर्यावरण संरक्षण पर दिया गया भरोसा
इस अवसर पर अदाणी समूह के वरीय पर्यावरण पदाधिकारी आर.एन. शुक्ला ने परियोजना से जुड़ी तकनीकी जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि पावर प्लांट में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा और पर्यावरण संरक्षण के सभी मानकों का सख्ती से पालन होगा। प्रदूषण नियंत्रण, हरित क्षेत्र विकास और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक उपाय किए जाएंगे।
आपको बता दें की इस जन सुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने पर्यावरण सुरक्षा, स्थानीय लोगों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने और क्षेत्रीय विकास कार्यों को लेकर अपनी अपेक्षाएं रखीं, जिस पर परियोजना प्रबंधन की ओर से सकारात्मक आश्वासन दिया गया।

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