क्यों था विवाद?
विकास प्राधिकरण अधिनियम के अनुसार नगरीय निकायों की सीमा के बाहर स्थित विकास क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के निर्माण के लिए संबंधित विकास प्राधिकरण से नक्शा पास कराना अनिवार्य है। लेकिन व्यवहार में बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए, जहां जिला पंचायत स्तर से मानचित्र स्वीकृत कर दिए गए। बाद में जब विकास प्राधिकरण ने इन्हें अवैध बताते हुए कार्रवाई शुरू की, तो आम नागरिक, आवंटी और बिल्डर विवाद में फंस गए।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश
इस मुद्दे पर आवास एवं शहरी नियोजन विभाग और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक बुलाई गई। बैठक में मुख्यमंत्री ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद साफ कहा कि अब ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें दोहरे अधिकार और भ्रम की कोई गुंजाइश न रहे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर कानून में संशोधन करने से सरकार पीछे नहीं हटेगी।
पुराने निर्माणों को मिल सकती है राहत
बैठक में इस बात पर भी विचार किया गया कि पहले से हो चुके निर्माण, जो तत्कालीन नियमों या प्रचलित प्रक्रिया के तहत किए गए हैं, उन्हें बेवजह परेशान न किया जाए। यदि निर्माण निर्धारित बायलॉज के अनुरूप हैं, तो उन्हें संरक्षित रखने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे, ताकि आम लोगों को आर्थिक और कानूनी नुकसान न हो।
छोटे शहरों के सुनियोजित विकास पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केवल विवाद समाधान तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि प्रदेश के सुनियोजित शहरी विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों के लिए मास्टर प्लान तैयार किए जाएं। इसके लिए संबंधित कानूनों में आवश्यक संशोधन करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
इस फैसले से आम नागरिकों को क्या फायदा?
इस फैसले से सबसे बड़ा फायदा आम नागरिकों को होगा। अब नक्शा पास कराने के लिए उन्हें अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और भविष्य में उनके मकान या दुकान को अवैध बताकर कार्रवाई का खतरा भी कम होगा। साथ ही, स्पष्ट नियमों से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक टकराव पर भी अंकुश लगेगा।

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