यूपी सरकार का बड़ा फैसला, जमीन मालिकों के लिए खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के करोड़ों जमीन मालिकों और आम नागरिकों को बड़ी राहत देने वाला अहम निर्णय लिया है। उप निबंधक कार्यालयों में पंजीकृत पुराने भूमि दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन प्रोजेक्ट को लेकर योगी सरकार ने इसकी अवधि को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में वर्ष 2002 से 2017 तक पंजीकृत विलेखों की स्कैनिंग और इंडेक्सिंग के कार्य को अगले छह महीने तक बढ़ाने का फैसला लिया गया।

बिना अतिरिक्त बजट पूरा होगा शेष कार्य

यह परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है और सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसके लिए किसी अतिरिक्त बजट की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। पहले ही उपलब्ध धनराशि के भीतर शेष कार्य को पूरा कर लिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी बनेगी और जमीन से जुड़े मामलों में लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

2022 में शुरू हुई थी योजना

भूमि अभिलेखों को डिजिटल रूप देने की इस योजना को वर्ष 2022 में 95 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति दी गई थी। बाद में व्यावहारिक कारणों और कार्य की व्यापकता को देखते हुए परियोजना की अवधि बढ़ाई गई और जुलाई 2024 में कुल लागत 123.62 करोड़ रुपये तय की गई। वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंत तक इस परियोजना पर 109.05 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि शेष राशि से बाकी काम पूरा किया जाएगा।

लगभग पूरा हो चुका है डिजिटाइजेशन

सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में इस परियोजना के तहत इंडेक्सिंग का 99 प्रतिशत से अधिक और स्कैनिंग का करीब 98 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। अधिकांश जिलों में यह काम पूरी तरह समाप्त हो चुका है। फिलहाल एटा, वाराणसी, मुरादाबाद, मैनपुरी, लखनऊ, अलीगढ़, हाथरस, आगरा, सहारनपुर और प्रयागराज में कुछ औपचारिक कार्य बाकी है, जिसे अगले छह महीनों में पूरा कर लिया जाएगा।

दो स्तर पर हो रहा है दस्तावेजों का सत्यापन

डिजिटाइजेशन की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सरकार ने दो-स्तरीय सत्यापन व्यवस्था लागू की है। पहले चरण में सहायक महानिरीक्षक निबंधन द्वारा दस्तावेजों की जांच की जा रही है, जबकि दूसरे चरण में मंडल और वृत्त स्तर पर उप महानिरीक्षक निबंधन द्वारा पुनः परीक्षण किया जा रहा है। इससे किसी भी प्रकार की त्रुटि की संभावना को न्यूनतम किया जा सकेगा।

इस नई व्यवस्था से जमीन मालिकों को मिलेगा फायदा

इस फैसले से जमीन मालिकों को पुराने दस्तावेजों की नकल, सत्यापन और कानूनी प्रक्रियाओं में काफी सहूलियत मिलेगी। भूमि विवादों के निपटारे में भी तेजी आएगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। डिजिटल रिकॉर्ड के चलते जमीन से जुड़ी जानकारी अब सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।

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