यह फैसला राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जन कल्याण संवाद के दौरान प्राप्त शिकायतों के विश्लेषण के बाद लिया गया है। लगातार यह बात सामने आ रही थी कि कई मामलों में कानून-व्यवस्था के नाम पर पुलिस अनावश्यक हस्तक्षेप कर रही है, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कानून-व्यवस्था तक सीमित रहेगी पुलिस की भूमिका
गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी और प्रधान सचिव सी.के. अनिल द्वारा जारी संयुक्त दिशा-निर्देश में साफ किया गया है कि भूमि विवाद से जुड़े मामलों में पुलिस का दायित्व केवल शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित रहेगा। जमीन के स्वामित्व, कब्जा या निर्माण जैसे मामलों में अब राजस्व और न्यायिक प्रक्रिया ही निर्णायक होगी।
नए नियमों के अनुसार, किसी भी भूमि विवाद की जानकारी थाना प्रभारी को अनिवार्य रूप से संबंधित अंचलाधिकारी को लिखित रूप में देनी होगी। यह सूचना ई-मेल या सरकारी पोर्टल के माध्यम से भी साझा की जा सकती है, जिससे पुलिस और राजस्व प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित हो सके।
बिना आदेश के कार्रवाई पर होगी सख्त कार्रवाई
डिप्टी सीएम सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अब न तो थानों की मनमानी चलेगी और न ही पुलिस हस्तक्षेप की आड़ में किसी को डराने-धमकाने की इजाजत होगी। उन्होंने कहा कि भूमि विवाद मूल रूप से राजस्व और न्यायालय से जुड़ा विषय है, पुलिस की स्वेच्छाचारिता का नहीं।
सरकार ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि बिना सक्षम प्राधिकार के आदेश के कहीं भी कब्जा दिलाने, चहारदीवारी कराने या निर्माण कराने की शिकायत सामने आती है, तो संबंधित पदाधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
थाना डायरी में दर्ज करनी होगी पूरी जानकारी
दिशा-निर्देशों के तहत अब हर भूमि विवाद की सूचना पर थाना डायरी में अलग और स्पष्ट प्रविष्टि करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसमें दोनों पक्षों का नाम और पता, विवाद की प्रकृति (राजस्व, सिविल या आपसी), विवादित जमीन का पूरा विवरण जैसे थाना, खाता, खेसरा, रकबा और जमीन की किस्म दर्ज करनी होगी। इसके अलावा पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक कार्रवाई और यह जानकारी भी दर्ज करनी होगी कि मामला प्रथम दृष्टया किस राजस्व न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।
सरकार का मानना है कि इन नए नियमों से जमीन विवादों में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम नागरिकों को पुलिस हस्तक्षेप से राहत मिलेगी। साथ ही, राजस्व और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत कर भूमि विवादों का समाधान अधिक व्यवस्थित और निष्पक्ष तरीके से हो सकेगा।

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