संशोधन की मंजूरी और प्रक्रिया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में गुरुवार को उप्र न्यायिक सेवा (सप्तम संशोधन) नियमावली 2026 को मंजूरी दी गई। यह कदम उच्च न्यायालय की संस्तुति और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा में तीन वर्ष का विधि प्रैक्टिस अनुभव अनिवार्य करने का आदेश दिया था, जिसे अब उत्तर प्रदेश सरकार ने लागू किया है।
नए नियम क्या हैं?
अब पीसीएस-जे की सीधी भर्ती के लिए उम्मीदवार का कम से कम तीन वर्ष का विधि व्यवसाय/वकालत अनुभव होना अनिवार्य है। यह नियम शैक्षिक योग्यता से संबंधित नियम 11 के अंतर्गत जोड़ा गया है। इससे पहले केवल एलएलबी होना ही पीसीएस-जे परीक्षा के लिए पर्याप्त था।
अन्य बदलाव और सुधार
सिर्फ भर्ती तक ही सीमित नहीं, नए संशोधन में प्रशिक्षण और पदोन्नति से जुड़े नियमों में भी सुधार किया गया है। साथ ही प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए कुछ नए नियम भी जोड़े गए हैं।
इस बदलाव का महत्व
सरकार का कहना है कि ये सुधार न केवल भर्ती प्रक्रिया को कठोर और व्यवस्थित बनाएंगे, बल्कि न्यायिक सेवा की गुणवत्ता और प्रशिक्षण के स्तर को भी बेहतर बनाएंगे। इससे प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी, और न्याय के त्वरित एवं प्रभावी वितरण में मदद मिलेगी।
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