वर्षों से अटका था मामला
शिक्षकों के लिए इंक्रीमेंट सिर्फ वेतन का सवाल नहीं, बल्कि सम्मान और मनोबल से भी जुड़ा विषय होता है। भागलपुर में चयनित शिक्षक पिछले कई महीनों से वेतनवृद्धि के इंतजार में थे। हर महीने तीन से चार हजार रुपये तक का नुकसान झेल रहे इन शिक्षकों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा था। अब जब प्रक्रिया शुरू हुई है, तो स्कूलों से लेकर दफ्तरों तक राहत का माहौल है।
युद्ध स्तर पर चल रहा काम
विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिला शिक्षा विभाग और जिला स्थापना शाखा को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि चार दिनों के भीतर सभी लंबित इंक्रीमेंट को अपडेट किया जाए। इसी कारण इसे “युद्ध स्तर” पर पूरा किया जा रहा है। इंक्रीमेंट को सीधे वेतन भुगतान प्रणाली से जोड़ दिया गया है, जिससे फाइलों की गति तेज हुई है।
भागलपुर जिला था सबसे पीछे
गौर करने वाली बात यह है कि बिहार के 37 जिलों में यह प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी थी, जबकि भागलपुर जिला सबसे पीछे रह गया था। इसी वजह से यहां शिक्षकों की नाराजगी भी ज्यादा थी। अब जब फाइलें आगे बढ़ी हैं, तो यह माना जा रहा है कि जल्द ही भागलपुर भी इस सूची से बाहर हो जाएगा।
तकनीकी चुनौतियां, लेकिन इरादे मजबूत
हालांकि एचआरएमएस पोर्टल पर एक-एक शिक्षक का इंक्रीमेंट अपडेट करना आसान काम नहीं है। सर्वर की धीमी गति और तकनीकी अड़चनें सामने आ रही हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इस बार किसी भी कीमत पर काम अधूरा नहीं छोड़ा जाएगा। अब तक जिले के आठ प्रखंडों में करीब 40 प्रतिशत शिक्षकों का इंक्रीमेंट अपडेट हो चुका है और उनके वेतन बिल ट्रेजरी को भेजे जा चुके हैं।
यह फैसला केवल वेतनवृद्धि तक सीमित नहीं है। यह सरकार और शिक्षकों के बीच भरोसे को फिर से मजबूत करने की कोशिश भी है। शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में काम कर रहे लोगों को समय पर उनका हक मिलना व्यवस्था की विश्वसनीयता तय करता है।

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