रॉकेट की रेंज में होगा बड़ा इजाफा
इस नई तकनीक के इस्तेमाल से मौजूदा रॉकेटों की मारक दूरी में जबरदस्त बढ़ोतरी संभव है। फिलहाल रूसी मूल के ग्रैड रॉकेट की रेंज करीब 40 किलोमीटर है, जो रैमजेट इंजन लगने के बाद लगभग 80 किलोमीटर तक पहुंच सकती है। वहीं, स्वदेशी पिनाका रॉकेट की रेंज मौजूदा लगभग 120 किलोमीटर से बढ़कर करीब 250 किलोमीटर तक होने की उम्मीद है।
कैसे काम करता है रैमजेट इंजन
रैमजेट तकनीक पारंपरिक रॉकेट इंजन से अलग होती है। सामान्य रॉकेट में ईंधन के साथ ऑक्सीडाइजर भी ले जाना पड़ता है, जबकि रैमजेट इंजन हवा से ऑक्सीजन लेकर ईंधन जलाता है। इससे रॉकेट लंबे समय तक थ्रस्ट बनाए रखता है और बिना आकार बढ़ाए ज्यादा दूरी तय कर सकता है।
ग्रैड रॉकेट से होगी शुरुआत
IIT मद्रास के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर पी. ए. रामकृष्णा के अनुसार, इस तकनीक का पहला लाइव परीक्षण ग्रैड मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर पर किया जाएगा। मार्च से टेस्टिंग की शुरुआत होगी और लक्ष्य है कि 2028 के अंत तक इसे पूरी तरह ऑपरेशनल बना दिया जाए। इसके बाद यह तकनीक रक्षा उद्योग को सौंपी जाएगी और फिर पिनाका सिस्टम में लागू की जाएगी।
सेना के लिए क्यों है अहम
लंबी दूरी तक मार करने वाला पिनाका सिस्टम भारतीय सेना को दुश्मन के अहम ठिकानों पर सुरक्षित दूरी से हमला करने की क्षमता देगा। इससे न केवल लॉन्च यूनिट सुरक्षित रहेगी, बल्कि दुश्मन की जवाबी कार्रवाई की सीमा से बाहर रहकर प्रभावी हमला किया जा सकेगा।
भविष्य की तकनीक की नींव
यह प्रोजेक्ट सिर्फ रॉकेट आर्टिलरी तक सीमित नहीं है। छोटे और शक्तिशाली रैमजेट इंजन का सफल विकास भारत को भविष्य की मिसाइल तकनीक और हाई-स्पीड फ्लाइट प्रोग्राम में भी मजबूत आधार देगा। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह एक अहम उपलब्धि साबित हो सकती है।

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